हाईकोर्ट ने मधुकम में अतिक्रमण हटाने का आदेश लिया वापस, प्रार्थी पर लगाया 12 लाख का जुर्माना

रांची। महादेव उरांव की अवमानना याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट ने फैसला सुना दिया है। मामले में कोर्ट ने रिट याचिका में प्रार्थी के पक्ष में सुनाए गए एकल पीठ के उस आदेश को वापस ले लिया है, जिसमें सीओ को रातू रोड स्थित मधुकम से

हाईकोर्ट

रांची। महादेव उरांव की अवमानना याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट ने फैसला सुना दिया है। मामले में कोर्ट ने रिट याचिका में प्रार्थी के पक्ष में सुनाए गए एकल पीठ के उस आदेश को वापस ले लिया है, जिसमें सीओ को रातू रोड स्थित मधुकम से अतिक्रमण हटाने से संबंधित कार्रवाई का आदेश दिया था।

कोर्ट ने कहा कि प्रार्थी ने रिट याचिका में प्रतिवादियों की ओर से दिए गए एक करोड़ की राशि के बारे में बात छिपाई थी। साथ ही उन्हें रिट याचिका में प्रतिवादी भी नहीं बनाया था। महादेव उरांव की ओर से दायर अवमानना याचिका पर फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति राजेश शंकर की कोर्ट ने प्रार्थी पर 12 लाख का जुर्माना लगाया है।

जुर्माना के रूप में प्रार्थी 12 प्रतिवादी (पीड़ितों) को 1-1 लाख रुपए देगा. कोर्ट ने कहा कि प्रार्थी ने शपथ पत्र में झूठे तथ्य दिए हैं और कोर्ट को गुमराह किया है। हस्तक्षेपकर्ताओं से पैसे लेनदेन की बात छिपाई है। हस्तक्षेपकर्ता की ओर से अधिवक्ता सचिन कुमार एवं अधिवक्ता गौरव राज ने पक्ष रखा।

दरअसल जिला प्रशासन ने खादगड़ा शिव-दुर्गा मंदिर रोड स्थित मुंडारी प्रकृति की जमीन पर बने 12 घरों को तोड़ने का आदेश दिया था। इसके तहत बुलडोजर की कार्रवाई शुरू की गई थी, जिसका स्थानीय निवासी विरोध कर रहे थे। स्थानीय लोगों का कहना था कि उन्होंने प्रतिकट्ठा 5.25 लाख रुपये के हिसाब से भुगतान कर जमीन खरीदी है और यहां घर बनाकर वर्षों से रह रहे हैं।  

लोगों का आरोप है कि 38.25 डिसमिल जमीन के लिए उन्होंने कुल भुगतान लगभग 1 करोड़ 8 लाख 93 हजार 750 रुपये किया गया था, लेकिन अब उन्हें बेदखल किया जा रहा है।

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