रांची : डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर लिखे शहीद वीर बुधु भगत विश्वविद्यालय के नाम को कथित तौर पर आधी रात में मिटाए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव आलोक कुमार दूबे ने इस घटना को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा है। उन्होंने नाम मिटाने की घटना की निष्पक्ष जांच कराने और इसके लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करने की मांग की है।
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आलोक कुमार दूबे ने कहा कि भाजपा के लोगों को शहीद वीर बुधु भगत के नाम से आपत्ति है तो उन्हें दिन के उजाले में सामने आकर विरोध करना चाहिए। आधी रात में चोरी-छिपे विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार से नाम मिटाने की जरूरत क्यों पड़ी? उन्होंने सवाल किया कि भाजपा के नेता खुलकर अपनी बात रखने से क्यों बच रहे हैं।
वीर बुधु भगत के नाम से भाजपा को परेशानी क्यों?
कांग्रेस महासचिव ने कहा कि शहीद वीर बुधु भगत कोई सामान्य नाम नहीं हैं। वे अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष करने वाले झारखंड के महान आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी और जननायक थे। उनका जीवन साहस, संघर्ष, स्वाभिमान और बलिदान की मिसाल है। उन्होंने सवाल उठाया कि विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर वीर बुधु भगत का नाम लिखे जाने से भाजपा को परेशानी क्यों हो रही है। आदिवासी समाज के महान स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मान देने पर आपत्ति क्यों जताई जा रही है?
आलोक कुमार दूबे ने कहा कि आदिवासी, दलित और अल्पसंख्यक समाज के महापुरुषों तथा उनके ऐतिहासिक योगदान को लेकर भाजपा की राजनीति पर बार-बार सवाल उठते रहे हैं। झारखंड की धरती के नायकों को सम्मान देने का अधिकार किसी राजनीतिक दल की अनुमति पर निर्भर नहीं होना चाहिए।
8 मई 2025 को कैबिनेट ने दी थी नाम बदलने की मंजूरी
आलोक कुमार दूबे ने बताया कि 8 मई 2025 को राज्य मंत्रिमंडल ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय का नाम बदलकर शहीद वीर बुधु भगत विश्वविद्यालय करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद नाम परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी होने में देरी और अब विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर लिखे नाम को मिटाए जाने की घटना गंभीर सवाल खड़े करती है।
नाम मिटाने की घटना की निष्पक्ष जांच की मांग
कांग्रेस नेता ने भाजपा को चुनौती देते हुए कहा कि यदि उसके नेताओं को वीर बुधु भगत के नाम से कोई परेशानी है तो वे सार्वजनिक रूप से सामने आकर अपनी आपत्ति बताएं। रात के अंधेरे में नाम मिटाने से न तो वीर बुधु भगत का इतिहास खत्म होगा और न ही झारखंड के आदिवासी समाज के दिलों में उनके प्रति सम्मान कम होगा। उन्होंने कहा कि महापुरुष किसी राजनीतिक दल की निजी संपत्ति नहीं होते। शहीद वीर बुधु भगत पूरे झारखंड और देश की ऐतिहासिक विरासत हैं। उनके सम्मान के मुद्दे पर राजनीति करने के बजाय भाजपा को अपनी आपत्तियों का स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
आलोक कुमार दूबे ने मांग की कि विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर नाम मिटाने की घटना की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि आधी रात में नाम किसके निर्देश पर और किन लोगों ने मिटाया। उन्होंने कहा कि झारखंड की जनता को इस मामले का जवाब मिलना चाहिए।



