जमशेदपुर : जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने बुधवार को राज्य के नगर निकायों की बदहाल व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री सह नगर विकास मंत्री हेमंत सोरेन से हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने खास तौर पर मानगो नगर निगम और जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (जेएनएसी) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। सरयू राय ने आरोप लगाया कि राज्य के नगर निकायों में नियम-कानून के बजाय राजनीतिक दबाव, मनमानी और प्रभावशाली लोगों की सिफारिशों के आधार पर कामकाज हो रहा है। उन्होंने कहा कि इसका खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है।
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सफाई व्यवस्था और राजनीतिक दबाव पर सवाल
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सरयू राय ने कहा कि मानगो नगर निगम और जेएनएसी में सफाई व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक है। उनके मुताबिक, सफाई जैसे बुनियादी जनहित के मुद्दे को भी कुछ लोगों ने राजनीतिक प्रचार का माध्यम बना लिया है। उन्होंने मिशन-29 के नाम पर सक्रिय कुछ लोगों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। सरयू राय ने आरोप लगाया कि सरकार में पहुंच और राजनीतिक प्रभाव का हवाला देकर नगरपालिका अधिकारियों पर दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने पूछा कि यदि अधिकारी राजनीतिक रसूख के आधार पर काम करेंगे, तो कानून और प्रशासनिक जवाबदेही का क्या महत्व रह जाएगा।
सभी नगर निकायों की समीक्षा की मांग
सरयू राय ने मुख्यमंत्री से पूछा कि नगर निकायों की बदहाली पर सरकार चुप क्यों है। उन्होंने कहा कि नगर विकास विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे मुख्यमंत्री को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नगरपालिकाएं किसी राजनीतिक गुट, ठेकेदार या प्रभावशाली व्यक्ति के इशारे पर नहीं, बल्कि निर्धारित नियमों और वैधानिक प्रक्रियाओं के तहत काम करें। विधायक ने मानगो नगर निगम और जेएनएसी समेत राज्य के सभी नगर निकायों की कार्यप्रणाली की समीक्षा कराने की मांग की। उन्होंने सफाई ठेकेदारों की जवाबदेही तय करने, कचरा उठाव और निष्पादन की नियमित निगरानी करने तथा लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई की मांग भी की।
बुनियादी सुविधाओं के लिए जवाबदेह व्यवस्था जरूरी
सरयू राय ने कहा कि पानी, सफाई, सड़क और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए प्रभावी और जवाबदेह व्यवस्था जरूरी है। उन्होंने कहा कि नगरपालिकाओं को ‘नरकपालिका’ बनने से रोकना सरकार की जिम्मेदारी है। विधायक के मुताबिक, नागरिक टैक्स और शुल्क बेहतर सुविधाएं पाने के लिए देते हैं, न कि कचरे के ढेर, गंदगी, टूटी सड़कों और प्रशासनिक मनमानी को झेलने के लिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से राजनीतिक दबाव से ऊपर उठकर नगर निकायों में पारदर्शी, निष्पक्ष और जवाबदेह व्यवस्था लागू करने का आग्रह किया। साथ ही कहा कि केवल निर्देश जारी करने के बजाय धरातल पर ठोस कार्रवाई सुनिश्चित करना जरूरी है।



