धनबाद : दीपावली समेत आने वाले त्योहारों में पटाखों से होने वाले वायु और ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद (जेएसपीसीबी) ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत पटाखों की बिक्री से लेकर उन्हें जलाने तक के नियम तय किए गए हैं। हालांकि, त्योहारों के दौरान इन नियमों का सख्ती से पालन कराना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना रहता है।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेशों के अनुपालन में प्रदूषण निवारण अधिनियम, 1981 की धारा 31(ए) के तहत ये निर्देश जारी किए गए हैं। इनके मुताबिक, राज्य के उन्हीं शहरी इलाकों में पटाखों की बिक्री की अनुमति होगी, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) अच्छा या संतोषजनक है। इसके लिए AQI का स्तर 1 से 100 के बीच होना चाहिए। निर्देशों के अनुसार, केवल उन्हीं पटाखों की बिक्री की अनुमति होगी, जिनकी ध्वनि सीमा 125 डेसिबल से कम होगी। इसके अलावा, अलग-अलग त्योहारों पर पटाखे जलाने के लिए समय भी निर्धारित किया गया है।
दीपावली से नववर्ष तक पटाखे जलाने का समय तय
जारी दिशा-निर्देशों के मुताबिक, अलग-अलग त्योहारों पर पटाखे जलाने की समय-सीमा इस प्रकार है:
- दीपावली और गुरुपर्व : रात 8 बजे से 10 बजे तक।
- छठ पूजा : सुबह 6 बजे से 8 बजे तक।
- क्रिसमस और नववर्ष : रात 11:55 बजे से मध्यरात्रि 12:30 बजे तक।
इन समय-सीमाओं के बाहर पटाखे जलाने की अनुमति नहीं होगी।
नियमों का पालन कराना प्रशासन के लिए चुनौती
प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए दिशा-निर्देश तो जारी कर दिए गए हैं, लेकिन त्योहारों के दौरान इनका पालन सुनिश्चित करना आसान नहीं होता। पटाखों की बिक्री, तय समय के भीतर आतिशबाजी और ध्वनि सीमा पर निगरानी रखना प्रशासन के लिए अहम होगा।




