आज पूरा विश्व एक अभूतपूर्व संकट, अस्थिरता और युद्धों के दौर से गुजर रहा है। यूरोप में जारी संघर्ष हो या पश्चिम एशिया में गहराता तनाव, आपूर्ति श्रृंखलाएं छिन्न-भिन्न हैं, वैश्विक ऊर्जा बाजार दबाव में है और विकसित अर्थव्यवस्थाएं सुस्ती तथा मुद्रास्फीति की दोहरी मार से जूझ रही हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने जहां वैश्विक विकास दर के मात्र 3.1 से 3.2 प्रतिशत के आसपास सीमित रहने का अनुमान जताया है, वहीं ऐसे जटिल और चुनौतीपूर्ण दौर में भारत का विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में मजबूती से खड़े रहना किसी आर्थिक चमत्कार से कम नहीं है। यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के निर्णायक नेतृत्व, दूरगामी नीतियों और सुधारोन्मुखी शासन का ही प्रत्यक्ष प्रमाण है।
आईएमएफ की नवीनतम ‘वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक’ रिपोर्ट ने इस पर आधिकारिक मुहर लगाई है। आईएमएफ के ताजा अनुमान के अनुसार, भारत की जीडीपी विकास दर 2026 और 2027, दोनों वर्षों में 7.0 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह आंकड़ा महज एक सांख्यिकी नहीं है, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था की अंतर्निहित मजबूती और लचीलेपन का साक्षात प्रमाण है। जहां दुनिया की बड़ी-बड़ी महाशक्तियां मंदी की आशंकाओं से घिरी हैं, वहीं भारत वैश्विक आर्थिक वृद्धि के सबसे बड़े इंजन के रूप में उभर रहा है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के तीसरे कार्यकाल में देश ने नीतिगत निरंतरता और साहसिक संरचनात्मक सुधारों का नया अध्याय देखा है। पीएम गति शक्ति, राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति और पूंजीगत व्यय (Capex) में निरंतर रिकॉर्ड वृद्धि ने देश के इंफ्रास्ट्रक्चर का कायाकल्प कर दिया है। ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘मेक इन इंडिया’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ जैसे संकल्पों ने घरेलू विनिर्माण को अभूतपूर्व संबल प्रदान किया है। Production Linked Incentive (पीएलआई) (PLI) योजनाओं के प्रभाव से आज भारत मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण का वैश्विक केंद्र बन चुका है, जिससे लाखों नए रोजगार सृजित हुए हैं।
इसके साथ ही, डिजिटल इंडिया और यूपीआई ने अर्थव्यवस्था को औपचारिक बनाकर अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक वित्तीय समावेशन पहुँचाया है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत हजारों गैर-जरूरी अनुपालनों को समाप्त कर एमएसएमई, खुदरा व्यापारियों और स्टार्टअप्स के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया गया है। आज भारत का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना चुका है।
परंतु, इस आर्थिक विजय यात्रा के बीच एक चिंताजनक और कड़वी सच्चाई की अनदेखी नहीं की जा सकती। जब पूरा विश्व भारत के आर्थिक लचीलेपन की सराहना कर रहा है, तब देश का कुछ हताश विपक्ष बाहरी शक्तियों के साथ मिलकर भारत के आंतरिक सौहार्द और आर्थिक प्रगति को पटरी से उतारने की साजिशों में लिप्त दिखाई देता है। विदेशी मंचों और संदिग्ध अंतरराष्ट्रीय थिंक टैंकों से परोक्ष वित्तीय व वैचारिक सहायता प्राप्त कर देश में सामाजिक विभाजन पैदा करने, निवेशकों के विश्वास को डिगाने और सरकार के विकासवादी कदमों पर भ्रम फैलाने के सुनियोजित प्रयास किए जा रहे हैं। भारतीय लोकतंत्र और अर्थव्यवस्था को बदनाम करने वाले यह ‘टूलकिट’ सिंडिकेट भूल जाते हैं कि 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाएं और उनका विश्वास प्रधानमंत्री मोदी जी के साथ चट्टान की तरह खड़ा है। देश विरोधी मंसूबे कभी भी भारत की विकास यात्रा को नहीं रोक सकते।
भारत की मजबूत घरेलू मांग, बढ़ता मध्यम वर्ग और पारदर्शी नीतियां देश को हर वैश्विक झटके को सहने में सक्षम बना रही हैं। भारत केवल एक बाजार नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक व्यवस्था के भविष्य की दिशा तय करने वाली महाशक्ति बन चुका है। हमारे व्यापारी, छोटे उद्यमी और कर्मठ कामगार इस आर्थिक क्रांति के असली ध्वजवाहक हैं।
2047 तक ‘विकसित भारत’ के निर्माण का जो संकल्प प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश को दिया है, यह आर्थिक गति उसी की मजबूत बुनियाद है। चुनौतियों से घिरी दुनिया में भारत एक स्थिर, सुरक्षित और प्रगतिशील प्रकाश स्तंभ बनकर दुनिया को रास्ता दिखा रहा है।
लेखक भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मंत्री और राज्यसभा सांसद
डॉ॰ प्रदीप कुमार वर्मा




