रांची: झारखंड में 108 एम्बुलेंसकर्मियों ने अपनी मांगों को लेकर 40 घंटे की हड़ताल शुरू कर दी है। इससे राज्यभर में 108 एम्बुलेंस सेवा प्रभावित हुई है। अलग-अलग जिलों से रांची पहुंचे कर्मचारी नामकुम स्थित राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) मुख्यालय के मुख्य गेट पर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं।
कर्मचारी झंडे-बैनर लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो आंदोलन के अगले चरण में 21 अक्टूबर 2026 से राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी।
वेतन, बहाली और श्रमिक अधिकारों की मांग
आंदोलन कर रहे कर्मचारियों की प्रमुख मांग है कि 108 एम्बुलेंस सेवा का संचालन जिला स्तर पर सिविल सर्जन के माध्यम से कराया जाए। इसके अलावा बर्खास्त कर्मचारियों की दोबारा बहाली और बकाया वेतन का भुगतान भी उनकी मांगों में शामिल है।
कर्मचारी चाहते हैं कि उन्हें सभी श्रमिक और वैधानिक अधिकार दिए जाएं। इसके तहत ईपीएफ-ईएसआईसी, ओवरटाइम, ग्रेच्युटी और न्यूनतम वेतन जैसी सुविधाएं सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई गई है।
पहले ही दी गई थी आंदोलन की सूचना
झारखंड प्रदेश एम्बुलेंस कर्मचारी संघ के अध्यक्ष नीरज तिवारी ने बताया कि संघ ने चरणबद्ध आंदोलन की जानकारी पहले ही 108 एम्बुलेंस सेवा का संचालन करने वाली एजेंसी सम्मान फाउंडेशन, स्वास्थ्य विभाग और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन को दे दी थी। उन्हें आंदोलन की पूरी रूपरेखा से भी अवगत कराया गया था।
नीरज तिवारी के मुताबिक, इसके बावजूद एजेंसी और सरकार ने कर्मचारियों की मांगों पर गंभीरता नहीं दिखाई। ऐसे में संघ के पास एम्बुलेंस सेवा ठप करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा।
उन्होंने दोहराया कि मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन जारी रहेगा। संघ 21 अक्टूबर 2026 से प्रस्तावित अनिश्चितकालीन हड़ताल के फैसले पर कायम है।
झारखंड में करीब 543 एम्बुलेंस
राज्य में करीब 543 एम्बुलेंस 108 सेवा के तहत मरीजों की मदद में लगी हैं। इनमें से 500 एम्बुलेंस के संचालन की जिम्मेदारी सम्मान फाउंडेशन के पास है।
ऐसे में कर्मचारियों की हड़ताल से राज्य में एम्बुलेंस सेवा प्रभावित होने का असर मरीजों को मिलने वाली आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ सकता है।




