नई दिल्ली : दिल्ली के जंतर-मंतर पर मंगलवार सुबह उस समय हंगामा हो गया, जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के अशुतोष रांका, सौरव दास और अजिंक्य शिंदे समेत कई कार्यकर्ता गेट और बैरिकेडिंग पार कर प्रदर्शन स्थल के अंदर पहुंच गए। दिल्ली पुलिस ने इसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया। इस दौरान मौके पर धक्का-मुक्की और अफरा-तफरी की स्थिति बनी रही। प्रदर्शनकारी हाथों में तिरंगा लेकर नारेबाजी करते नजर आए।
बैरिकेडिंग पार कर प्रदर्शन स्थल में पहुंचे कार्यकर्ता
CJP की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए वीडियो में कई कार्यकर्ता लोहे के गेट पर चढ़ते और बैरिकेडिंग पार करते दिखाई दे रहे हैं। उनके हाथों में तिरंगा झंडा भी नजर आ रहा है। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की, जिस दौरान दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की हुई।
We are NOT backing off!
— Cockroach Janta Party – CJP (@Cockroachisback) October 13, 2026
CJP ने किया जंतर-मंतर पहुंचने का दावा
CJP ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि उसके कार्यकर्ता भारी बैरिकेडिंग के बावजूद जंतर-मंतर के प्रदर्शन स्थल के अंदर पहुंच गए। संगठन ने इसे प्रदर्शन स्थल पर दोबारा पहुंचने की घटना बताते हुए लिखा, ‘Fortress Jantar Mantar has been reclaimed’ यानी जंतर-मंतर पर फिर से पहुंच बना ली गई है। पार्टी ने यह भी दावा किया कि उसके कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन स्थल पर तिरंगा लहराया। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने एक्स पर पोस्ट कर बताया कि कार्यकर्ता सुबह-सुबह जंतर-मंतर पहुंचे थे। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने अशुतोष रांका, सौरव दास, अजिंक्य शिंदे और टीम के अन्य सदस्यों को हिरासत में ले लिया। दीपके ने अपनी पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टैग करते हुए लिखा कि विरोध की आवाज को बंद नहीं किया जा सकता।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन स्थल को लेकर क्यों बढ़ा विवाद?
CJP नेताओं के खिलाफ यह कार्रवाई सरकार की ओर से जंतर-मंतर को निर्धारित विरोध स्थल के रूप में निरस्त करने के एक दिन बाद हुई। इसके साथ ही पूर्वी दिल्ली के रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और CBD मैदान को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के लिए नए स्थल घोषित किया गया है। दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) में कथित अनियमितताओं और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर राजनीतिक गतिरोध जारी है। इसी बीच जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन की अनुमति और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर विवाद गहरा गया है। जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के लिए दिल्ली पुलिस को दी गई 24 घंटे की समयसीमा मंगलवार को समाप्त हो रही है। वहीं, सर्वोच्च न्यायालय और दिल्ली उच्च न्यायालय में विरोध प्रदर्शन पर प्रतिबंध, गिरफ्तारियों और जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल के रूप में बंद करने से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई होनी है।
शनिवार से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन, सोमवार को विपक्ष ने निकाला मार्च
बीते शनिवार यानी 10 अक्टूबर को CJP ने चुनाव आयोग के प्रमुख और SIR प्रक्रिया के विरोध में जंतर-मंतर तक मार्च निकालने की कोशिश की थी। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने राजधानी में व्यापक प्रतिबंध लागू किए। हजारों पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई, कई मार्गों को सील किया गया और कुछ मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए गए। इस दौरान CJP नेताओं के साथ विपक्षी नेताओं, छात्रों, वकीलों और पत्रकारों समेत हजारों लोगों को हिरासत में लिया गया। इनमें से अधिकांश को कुछ घंटों बाद रिहा कर दिया गया।
रविवार को भी बैरिकेडिंग, सीमित इंटरनेट सेवा और परिवहन में व्यवधान के बावजूद विरोध प्रदर्शन जारी रहे। सर्वोच्च न्यायालय ने विशेष सुनवाई की और अधिकारियों को कानून-व्यवस्था का ध्यान रखते हुए सामान्य मेट्रो और रेल संचालन बहाल रखने, इंटरनेट सेवाएं जारी रखने तथा अवैध गिरफ्तारियों को रोकने के निर्देश दिए। CJP नेताओं को कुछ शर्तों के साथ रिहा कर दिया गया, लेकिन पार्टी ने आंदोलन जारी रखने का संकल्प लिया। सोमवार को राहुल गांधी के नेतृत्व में इंडिया ब्लॉक के सांसदों और कार्यकर्ताओं ने ‘लोकतंत्र के लिए मार्च’ निकाला। विपक्षी नेताओं ने सर्वोच्च न्यायालय तक मार्च करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें भगवान दास रोड पर रोक दिया गया। हालांकि, राहुल गांधी और अन्य नेता सर्वोच्च न्यायालय पहुंच गए।
वहां कांग्रेस की कानूनी टीम ने SIR पर चुनाव आयोग के फैसलों को चुनौती देते हुए याचिका दायर की। याचिका में मतदाता सूची से कथित तौर पर नाम हटाए जाने के मामलों की स्वतंत्र जांच की मांग भी की गई। विपक्ष की ओर से मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत से मिलने का प्रयास किया गया, लेकिन यह प्रयास स्वीकार नहीं हुआ।




