रांची : CM हेमंत सोरेन का पुतला फूंकने के दौरान सरकारी काम में बाधा डालने और मारपीट के मामले में छात्र आंदोलन से जुड़े कुणाल प्रताप सिंह और चितरंजन सिंह को बड़ी राहत मिली है। रांची सिविल कोर्ट ने दोनों को अग्रिम जमानत दे दी है। मामले में रांची सिविल कोर्ट के अपर न्यायायुक्त-3 की अदालत में दोनों की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद कोर्ट ने दोनों आरोपियों को अग्रिम जमानत देने का फैसला सुनाया। दरअसल, JPSC और JSSC परीक्षा को लेकर हुए आंदोलन के बाद रांची के अल्बर्ट एक्का चौक पर CM हेमंत सोरेन का पुतला फूंका गया था। इस दौरान सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में रांची जिला प्रशासन ने कुणाल प्रताप सिंह और चितरंजन सिंह के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
Read More : दिल्ली मेट्रो के 57 स्टेशनों पर एंट्री-एग्जिट बंद, DMRC ने दी मंजूरी
कोतवाली थाना में दर्ज हुआ था केस
कोतवाली थाना में दर्ज प्राथमिकी के मुताबिक, आरोपियों ने बिना अनुमति जुलूस निकाला और सरकारी कामकाज में बाधा डाली। इस मामले में पुलिस ने कांड संख्या 183/2026 के तहत केस दर्ज किया था। केस दर्ज होने के बाद आरोपियों की गिरफ्तारी की आशंका बनी हुई थी। अब अदालत से अग्रिम जमानत मिलने के बाद दोनों को इस मामले में राहत मिल गई है। कुणाल प्रताप सिंह और चितरंजन सिंह की ओर से अधिवक्ता सूरज किशोर प्रसाद ने अदालत में अग्रिम जमानत याचिका पर बहस की।
मारपीट के मामले में भी मिली अग्रिम जमानत
CM का पुतला दहन करने के दौरान एक मुस्लिम युवक के साथ मारपीट का मामला भी दर्ज हुआ था। इस मामले में रांची के लोअर बाजार थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। इस केस में भी कुणाल प्रताप सिंह और चितरंजन सिंह को अग्रिम जमानत मिल गई है। इस तरह सरकारी काम में बाधा डालने और मारपीट, दोनों मामलों में अदालत ने उन्हें अग्रिम जमानत की सुविधा दे दी है।




