जयपाल-जुलियस-हन्ना साहित्य पुरस्कार 2026 के लिए 3 कवि चयनित

रांची : पांचवें ‘जयपाल-जुलियस-हन्ना साहित्य पुरस्कार 2026’ के लिए तीन युवा आदिवासी कवियों की अप्रकाशित पांडुलिपियों का चयन किया गया है। इनमें महाराष्ट्र के कोकणा आदिवासी कवि भावेश गोंदू बागुल, रांची की उरांव कवयित्री नीतिशा खलखो और नेतरहाट, झारखंड की नवोदित असुर कवयित्री छोटनी कुमारी

पुरस्कार
तीन युवा कवि होंगे सम्मानित

अपनी भाषा में पढ़ें

Advertisement

रांची : पांचवें ‘जयपाल-जुलियस-हन्ना साहित्य पुरस्कार 2026’ के लिए तीन युवा आदिवासी कवियों की अप्रकाशित पांडुलिपियों का चयन किया गया है। इनमें महाराष्ट्र के कोकणा आदिवासी कवि भावेश गोंदू बागुल, रांची की उरांव कवयित्री नीतिशा खलखो और नेतरहाट, झारखंड की नवोदित असुर कवयित्री छोटनी कुमारी शामिल हैं। तीनों रचनाकारों को 22 नवंबर को रांची में आयोजित समारोह में सम्मानित किया जाएगा। भावेश गोंदू बागुल के काव्य-संग्रह ‘भूक का चाँद’, नीतिशा खलखो की ‘खदबदा रहे हैं जंगल’ और छोटनी कुमारी के असुर-हिंदी द्विभाषी काव्य-संग्रह ‘सँड़सी-कुटासी ठन-ठन’ का चयन पुरस्कार के लिए किया गया है।

Read More : ऑर्किड मेडिकल सेंटर रांची में DNB General Surgery की 2 सीट मंजूर

30 से अधिक पांडुलिपियों में हुआ चयन

पुरस्कार चयन समिति की संयोजिका डॉ. प्रीति रंजना डुंगडुंग ने बताया कि इस वर्ष देशभर से 30 से अधिक आदिवासी पांडुलिपियां प्राप्त हुई थीं। चयन समिति ने इनमें से तीन कृतियों को पुरस्कार के लिए चुना है। इनमें दो काव्य-संग्रह हिंदी में हैं, जबकि ‘सँड़सी-कुटासी ठन-ठन’ असुर और हिंदी का द्विभाषी संग्रह है।

चार अन्य पांडुलिपियां भी होंगी प्रकाशित

चयन समिति ने चार अन्य पांडुलिपियों को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से प्रकाशित करने का फैसला किया है। इनमें भील कवि अरुण कटारा की ‘वाट नो वटारू’, मनोज-मनीष मीणा की ‘नहीं आती अब ग़दूली से तमाकू की महक’, संताली कवि सुलेमान मराण्डी की ‘बोदोल जुमी’ और महाराष्ट्र के तड़वी-भील कवि अलताफ सलीम तड़वी की ‘जतरा’ शामिल हैं। प्यारा केरकेट्टा फाउंडेशन की सचिव और आदिवासी विदुषी वंदना टेटे ने बताया कि आदिवासी भाषाओं के लेखकों और उनकी अप्रकाशित रचनाओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से यह पुरस्कार वर्ष 2022 में शुरू किया गया था। इसके तहत हर वर्ष तीन उत्कृष्ट अप्रकाशित पांडुलिपियों को पुरस्कृत किया जाता है और उन्हें पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया जाता है।

अब तक 12 आदिवासी रचनाकार सम्मानित

यह पुरस्कार भारत के आधुनिक आदिवासी आंदोलन के तीन प्रमुख अगुओं – जयपाल सिंह मुंडा, जुलियस तिग्गा और हन्ना बोदरा—के नाम पर स्थापित किया गया है। अब तक इसके तहत 12 आदिवासी रचनाकार सम्मानित हो चुके हैं। पुरस्कार का आयोजन झारखंडी भाषा साहित्य संस्कृति अखड़ा और टाटा स्टील फाउंडेशन, जमशेदपुर के सहयोग से प्यारा केरकेट्टा फाउंडेशन करता है।

विजेताओं को मिलेगी रॉयल्टी भी

पुरस्कार पाने वाले रचनाकारों को प्रकाशित पुस्तक की 50 प्रतियां निःशुल्क दी जाती हैं। इसके अलावा पुस्तक की बिक्री पर 10 प्रतिशत वार्षिक रॉयल्टी और 100 प्रतियों की अग्रिम रॉयल्टी नकद दी जाती है। सम्मान समारोह में विजेताओं को अंगवस्त्र, मानपत्र और प्रतीक-चिह्न भी प्रदान किए जाएंगे।

WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉 Join Now
Facebook
X
Threads
WhatsApp
Telegram
संबंधित खबरें.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *