नई दिल्ली : पीएम नरेंद्र मोदी ने सार्वजनिक जीवन में 25 साल पूरे कर लिए हैं। इस मौके पर दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में विकसित भारत संकल्प सभा रखी गई। कार्यक्रम में पीएम मोदी ने अपने 25 साल के सार्वजनिक जीवन के सफर को याद किया और देश के आगे के बड़े लक्ष्यों की भी बात रखी। इसी दौरान उन्होंने दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की घटना का भी जिक्र किया। पीएम मोदी ने कहा कि आज दुनिया भर में भारतीय पायलट की चर्चा हो रही है। उन्होंने कहा कि अब वह दिन भी दूर नहीं, जब दुनिया भर में मेड-इन-इंडिया विमान की चर्चा होगी।
Read More : RBI ने रेपो रेट 0.25% बढ़ाया, महंगे होंगे होम और कार लोन
बड़े लक्ष्य के लिए दूरदर्शी नीतियां और मेहनत जरूरी
पीएम मोदी ने कहा कि बड़े लक्ष्यों को हासिल करने के लिए दूरदर्शी नीतियां बनानी होंगी और पूरी मेहनत करनी होगी। उन्होंने कहा कि यह आराम करने का समय नहीं है। देश को पूरे जोश के साथ आगे बढ़ाने और खुद को राष्ट्र के लिए पूरी तरह समर्पित करने का समय है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय की जरूरतों को समझकर नीतियां बनानी होंगी। सिर्फ बातें करने से लक्ष्य हासिल नहीं होंगे। इसके लिए दिन-रात मेहनत करनी होगी। पीएम मोदी ने कहा कि अभी रुकने या पीछे मुड़कर देखने का समय नहीं है। देश को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए पूरी ताकत और नए उत्साह के साथ आगे बढ़ना होगा।
ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र, आतंकवाद पर भारत की कार्रवाई गिनाई
पीएम मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की कार्रवाई का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आतंकवादियों के आकाओं को घर में घुसकर मारा गया और आतंकवाद के खिलाफ घर में घुसकर कार्रवाई की गई। पीएम मोदी ने कहा कि इस कार्रवाई से दुश्मनों को भारत की ताकत का एहसास कराया गया। उनके बयान में आतंकवाद के खिलाफ भारत की कार्रवाई और सख्त रुख का जिक्र रहा।
25 साल का जनविश्वास और अनुभव बड़ी पूंजी
पीएम मोदी ने कहा कि सार्वजनिक जीवन के 25 साल का जनविश्वास और अनुभव उनके लिए बड़ी पूंजी है। उन्होंने कहा कि यह पूंजी सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि देश की है और मां भारती की हर संतान इस पूंजी की अधिकारी है। अपने स्कूल के दिनों को याद करते हुए PM ने कहा कि सीखने की ललक उनके जीवन का हिस्सा बन गई। उन्होंने कहा कि वह आज भी खुद को विद्यार्थी मानते हैं। पीएम मोदी ने कहा कि उन्होंने ईश्वर से हमेशा यही मांगा है कि उनके भीतर सीखने की इच्छा कभी कम न हो।
‘जिसने गिराया, उसने उठना सिखाया’
PM ने अपने पुराने सफर को याद करते हुए कहा कि पीछे मुड़कर देखने पर मन में कृतज्ञता का भाव आता है। उनके मुताबिक, जिंदगी की हर घटना ने उन्हें कुछ न कुछ सिखाया। उन्होंने कहा, जिसने गिराया, उसी ने खड़ा होना सिखाया और जिसने विरोध किया, उसने लोकतंत्र की ताकत समझने का मौका दिया। पीएम मोदी ने कहा कि हर संकट उनके धैर्य की परीक्षा रहा, जबकि हर सफलता ने उन्हें बड़े लक्ष्यों की तरफ बढ़ने की ताकत दी। उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन के अनुभवों को देश की यात्रा से जोड़ते हुए कहा कि इन अनुभवों ने उन्हें लगातार सीखने और आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
‘हम सेवक हैं, सेवा हमारा धर्म है’
पीएम मोदी ने कहा कि वेद से लेकर स्वामी विवेकानंद तक भारत ने महान विचारों की परंपरा को आगे बढ़ाया है। हजारों साल के अनुभव वाले इस देश ने पूरी मानवता को इंसानियत पर भरोसा करना सिखाया है। उन्होंने कहा कि उन्हें कभी ऐसा महसूस नहीं हुआ कि वह अकेले हैं। पीएम मोदी ने कहा, ‘हम सेवक हैं और सेवा हमारा धर्म है।’ उन्होंने कहा कि दीन-दुखियों की सेवा करना भी हमारा धर्म है। देश और समाज की सेवा की भावना ही सार्वजनिक जीवन की सबसे बड़ी ताकत है।
पुराने सफर को याद करने से ज्यादा नए संकल्प जरूरी
PM ने सार्वजनिक जीवन की यात्रा में हर कदम पर साथ देने वाले स्वयंसेवकों और कार्यकर्ताओं को नमन किया। उन्होंने कहा कि आज का दिन सिर्फ पुरानी यादों को ताजा करने का दिन नहीं है। यह अपने संकल्पों को नई ऊर्जा देने का मौका है। पीएम मोदी ने कहा कि यह उस वादे और इरादे को दोहराने का दिन है कि ‘हम करके रहेंगे।’ उन्होंने कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए कहा, ‘वी विल डू इट। वी विल डू इट।’ पीएम मोदी ने कहा कि लाल किले से उन्होंने ‘सबका प्रयास’ की बात कही थी। भारत को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए जरूरी जज्बा एक ही संदेश देता है – हम करके रहेंगे।
‘विकसित भारत’, ‘आत्मनिर्भर भारत’ समेत कई लक्ष्य गिनाए
PM ने कार्यकर्ताओं से नारे लगवाते हुए कहा :
‘विकसित भारत बाय 2047, वी विल डू इट।
तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी, वी विल डू इट।
आत्मनिर्भर भारत, वी विल डू इट।
ओलिंपिक्स का आयोजन, वी विल डू इट।
अंतरिक्ष में कदम, वी विल डू इट।’
पीएम मोदी ने कहा कि यह ऊर्जा और आत्मविश्वास अद्भुत है। उन्होंने कहा कि जहां ये बातें लहू बनकर दौड़ती हैं, उन्हें कोई रोक नहीं सकता। PM ने कहा कि लोग 25 साल की इस यात्रा को उपलब्धि के तौर पर देखते हैं, लेकिन अब इन उपलब्धियों को आगे के बड़े लक्ष्यों की नींव बनाना है।





