नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने कांग्रेस और इंडियन एक्सप्रेस के बीच कथित संबंधों को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने इंडियन एक्सप्रेस को 81.45 लाख रुपये का भुगतान किया। यह दावा ऐसे समय में आया है जब इंडियन एक्सप्रेस की चुनाव आयोग से जुड़ी हालिया रिपोर्टों को लेकर राजनीतिक विवाद चल रहा है। जेठमलानी ने इन रिपोर्टों पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस की ओर से किए गए भुगतान को अपने दावे के समर्थन में पेश किया है। हालांकि, किसी राजनीतिक दल की ओर से किसी मीडिया संस्थान को चुनावी खर्च के तहत किया गया भुगतान अपने आप में संपादकीय प्रभाव या खबरों की दिशा तय करने का प्रमाण नहीं है। उपलब्ध खर्च संबंधी रिकॉर्ड भुगतान को दिखाता है, लेकिन उससे संपादकीय फैसलों पर प्रभाव का निष्कर्ष अपने आप नहीं निकलता।
₹81.45 लाख के भुगतान का दावा
जेठमलानी ने 28 सितंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा कि कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान इंडियन एक्सप्रेस को 81 लाख रुपये दिए। उपलब्ध चुनावी खर्च के दस्तावेज में इंडियन एक्सप्रेस के नाम 81,45,780 रुपये की एंट्री होने की रिपोर्ट सामने आई है। जेठमलानी ने इसी भुगतान को लेकर कांग्रेस और इंडियन एक्सप्रेस के बीच कथित सांठगांठ का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी दावा किया कि कर्नाटक चुनाव के दौरान भी इंडियन एक्सप्रेस से संबंधित खर्च दर्ज किया गया था और आगे और जानकारी सामने आने की बात कही।
And there comes the proof. Congress gave Indian Express INR 81 lakhs during the West Bengal elections. And then in the Karnataka elections. Much more than it gave any other newspaper singularly. Much more to tumble out soon.
It’s not done, bro! It’s just the tip of the iceberg. https://t.co/RaIt7EKrt1 pic.twitter.com/G6tZ9j3n6E
— Mahesh Jethmalani (@JethmalaniM) September 28, 2026
चुनाव आयोग की रिपोर्टिंग पर भी उठाए सवाल
जेठमलानी ने इंडियन एक्सप्रेस की चुनाव आयोग से जुड़ी हालिया रिपोर्टिंग को भी निशाने पर लिया। इंडियन एक्सप्रेस ने चुनाव आयोग के भीतर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दो अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेदों तथा SIR से जुड़े फैसलों को लेकर रिपोर्ट प्रकाशित की थी। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कुछ फैसलों को लेकर आपत्तियां दर्ज की थीं। इनमें नए मतदाताओं को जोड़ने और चुनावी डेटा से जुड़े कुछ मुद्दे शामिल थे। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने कहा है कि उसके अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए और आंतरिक विचार-विमर्श में अलग-अलग सुझाव या टिप्पणियां होना संस्थागत विभाजन का प्रमाण नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा मामला
चुनाव आयोग के कामकाज और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका को लेकर उठे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई करने पर सहमति जताई है। याचिका में आयोग के सामूहिक निर्णय लेने की प्रक्रिया और SIR की वैधता से जुड़े सवाल उठाए गए हैं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि कुछ महत्वपूर्ण फैसलों में अन्य चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों के बावजूद निर्णय लिए गए। हालांकि, चुनाव आयोग का कहना है कि अंतिम फैसले सर्वसम्मति से हुए हैं।
रामनाथ गोयनका की विरासत का भी जिक्र
जेठमलानी ने अपने पोस्ट में इंडियन एक्सप्रेस के संस्थापक रामनाथ गोयनका की पत्रकारिता की विरासत का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि अखबार की मौजूदा रिपोर्टिंग उसके संस्थापक की विचारधारा से अलग हो गई है। उन्होंने UPA सरकार के दौरान अखबार की रिपोर्टिंग पर भी सवाल उठाए। जेठमलानी ने 2012 में सेना की दो टुकड़ियों के दिल्ली की ओर बढ़ने से संबंधित रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए इसे गलत बताया और कहा कि इससे भारतीय सेना की साख पर असर पड़ा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र में BJP और NDA सरकार आने के बाद इंडियन एक्सप्रेस उन मुद्दों को प्रमुखता देता है जिन्हें कांग्रेस और उसके सहयोगी राजनीतिक तौर पर उठाते हैं। ये जेठमलानी के आरोप हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के तौर पर नहीं रखा जा सकता।
कर्नाटक चुनाव के खर्च का भी जिक्र
विवाद में सामने आए खर्च संबंधी दस्तावेजों में 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव से जुड़े इंडियन एक्सप्रेस के नाम वाले खर्च का भी उल्लेख किया गया है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, Udayavani & India Express के नाम 1,40,29,690 रुपये की एक एंट्री और 92,43,975 रुपये की दूसरी एंट्री का उल्लेख है। हालांकि, इन खर्चों से भी यह स्वतः साबित नहीं होता कि किसी मीडिया संस्थान की संपादकीय नीति पर राजनीतिक दल का प्रभाव था। ऐसे निष्कर्ष के लिए भुगतान के उद्देश्य और संपादकीय फैसलों के बीच प्रत्यक्ष प्रमाण की जरूरत होगी।
विवाद के केंद्र में क्या है?
मामले में एक तरफ कांग्रेस के चुनावी खर्च में इंडियन एक्सप्रेस को किए गए भुगतान की एंट्री का दावा है, जबकि दूसरी तरफ चुनाव आयोग की रिपोर्टिंग को लेकर जेठमलानी के आरोप हैं। चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों को लेकर इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट और आयोग की ओर से दी गई सफाई दोनों सार्वजनिक रिकॉर्ड का हिस्सा हैं। आयोग ने अपने फैसलों को सर्वसम्मत बताया है, जबकि इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्टों में दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का उल्लेख किया गया है। इस पूरे विवाद में ₹81.45 लाख का भुगतान एक दर्ज वित्तीय लेनदेन के रूप में सामने आया है। लेकिन केवल इस भुगतान के आधार पर कांग्रेस और इंडियन एक्सप्रेस के बीच संपादकीय सांठगांठ स्थापित नहीं होती।





