दशलक्षण महापर्व : रांची में आचार्य ज्ञेयसागर ने तप का महत्व बताया

रांची : दशलक्षण महापर्व के अवसर पर रांची में ससंघ विराजमान परम पूज्य आचार्य श्री ज्ञेयसागर जी महाराज और मुनिश्री नियोग सागर जी महाराज के सानिध्य में उत्तम तप धर्म पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर आयोजित धर्मसभा में संतों

दशलक्षण महापर्व
जैन मंदिर में हुई विशेष पूजा-अर्चना

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रांची : दशलक्षण महापर्व के अवसर पर रांची में ससंघ विराजमान परम पूज्य आचार्य श्री ज्ञेयसागर जी महाराज और मुनिश्री नियोग सागर जी महाराज के सानिध्य में उत्तम तप धर्म पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर आयोजित धर्मसभा में संतों ने श्रद्धालुओं को तप के वास्तविक स्वरूप और आत्म-साधना का महत्व बताया। धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री ज्ञेयसागर जी महाराज ने कहा कि जैन दर्शन में ‘इच्छा निरोधस्तपः’ कहा गया है। इसका अर्थ है कि अनियंत्रित इच्छाओं, तृष्णाओं और वासनाओं पर अंकुश लगाना ही वास्तविक उत्तम तप धर्म है।

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उन्होंने कहा कि केवल शरीर को भूखा रखना या काय-क्लेश करना ही पूर्ण तप नहीं है। बाहरी क्रियाओं के साथ अंतरंग वृत्तियों को शुद्ध करना भी जरूरी है। आचार्य श्री ने कहा कि जिस तरह अग्नि में तपने के बाद कच्चा सोना शुद्ध कुंदन बनता है, उसी तरह तपस्या रूपी अग्नि में स्वयं को तपाने से आत्मा पर लगे जन्म-जन्मांतर के कर्म-मल नष्ट होते हैं और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।

मुनिश्री नियोग सागर ने बताया 12 प्रकार के तप का महत्व

मुनिश्री नियोग सागर जी महाराज ने श्रावकों को आत्म-साधना की प्रेरणा दी। उन्होंने बताया कि जैन धर्म में 12 प्रकार के तप बताए गए हैं। उन्होंने कहा कि बाह्य तप जैसे अनशन, अवमौदर्य और व्रत-परिसंख्यान शरीर को अनुशासित करते हैं। वहीं अंतरंग तप में विनय, वैयावृत्य, स्वाध्याय और ध्यान शामिल हैं, जो आत्मा को परमात्मा से साक्षात्कार की दिशा में ले जाते हैं। मुनिश्री ने कहा कि तप हमेशा अहंकार से मुक्त होकर और कषायों को शांत करने के लिए किया जाना चाहिए। इसे सामाजिक प्रतिष्ठा या प्रदर्शन का माध्यम नहीं बनाना चाहिए।

दोनों जैन मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना

उत्तम तप धर्म पर्व के अवसर पर रांची स्थित दोनों जैन मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना हुई। श्रद्धालुओं से मंदिर परिसर भरा रहा। अपर बाजार जैन मंदिर के बड़े हॉल में वाद्य यंत्रों के साथ संगीतमय सामूहिक पूजन किया गया। पूजन के बाद विद्वान प्रदीप जी शास्त्री पियूष ने शास्त्र वाचन और मंडल पूजन कराया। इस अवसर पर छितरमल राजेश कुमार राकेश कुमार गंगवाल परिवार और धर्मचंद राजेश कुमार अनिल कुमार गंगवाल परिवार की ओर से अपर बाजार मंदिर में शांतिधारा की गई।

वासुपूज्य जिनालय में संजय कुमार, अजय कुमार, विजय कुमार, मनीष कुमार काला परिवार तथा प्रदीप कुमार, निशांत कुमार अजमेरा परिवार की ओर से शांतिधारा की गई। सामूहिक पूजन के दौरान राजेंद्र कुमार, संजीव कुमार, सुबोध कुमार, राहुल कुमार बड़जात्या परिवार; विमल कुमार, अमित कुमार बड़जात्या परिवार; अनूप कुमार, दक्ष कुमार बड़जात्या परिवार तथा विजय कुमार, तन्मय कुमार, मुदित कुमार लुहाड़िया परिवार ने शांतिधारा की। यह जानकारी मीडिया प्रभारी राकेश काशलीवाल ने दी।

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