रांची : 14वीं JPSC PT और Forest Range Officer (FRO) परीक्षा में कथित गड़बड़ी के मामले में लालू कुमार यादव की भूमिका को लेकर जांच में कई अहम बातें सामने आई हैं। रांची की अदालत ने सोमवार को उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। CID के मुताबिक, जांच में गिरफ्तार आरोपी अभय कुमार तिवारी ने लालू यादव को अपना एजेंट बताया है। CID का आरोप है कि लालू यादव सिर्फ परीक्षा में शामिल होने वाला अभ्यर्थी नहीं था, बल्कि अभय तिवारी और अन्य अभ्यर्थियों के बीच कथित लिंक के तौर पर काम कर रहा था। अदालत ने केस डायरी में उपलब्ध सामग्री के आधार पर मामले में उसकी भूमिका की आगे जांच को जरूरी माना है।
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अभय तिवारी से कनेक्शन का दावा
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, जांच के दौरान अभय कुमार तिवारी ने लालू कुमार यादव को एजेंट बताया। CID का दावा है कि लालू के जरिए अभ्यर्थियों की परीक्षा में कथित सेटिंग कराई जाती थी। इस संबंध में जांच एजेंसी ने अदालत के सामने कई साक्ष्यों का उल्लेख किया। जांच एजेंसी के अनुसार, लालू यादव ने खुद भी 14वीं JPSC PT और FRO परीक्षा पास की थी। हालांकि, जांच का फोकस उसकी अपनी परीक्षा सफलता के अलावा दूसरे अभ्यर्थियों से कथित जुड़ाव पर भी है।
घर से OMR कॉपियां और चेक मिलने का दावा
CID के अनुसार, लालू यादव के घर पर की गई तलाशी के दौरान दूसरे अभ्यर्थियों की OMR उत्तरपुस्तिका की तीन कार्बन कॉपियां मिलीं। इसके अलावा अभय कुमार तिवारी के हस्ताक्षर वाला 8 लाख रुपये का चेक और अलग-अलग बैंक खातों के कुछ ब्लैंक चेक मिलने का भी दावा किया गया है। अभियोजन पक्ष ने इन दस्तावेजों को मामले में कथित नेटवर्क और वित्तीय लेनदेन की जांच से जोड़कर अदालत के सामने रखा।
1.40 लाख रुपये के UPI ट्रांजैक्शन का भी जिक्र
CID के मुताबिक, लालू कुमार यादव और अभय कुमार तिवारी के बीच 1.40 लाख रुपये के UPI ट्रांजैक्शन का साक्ष्य भी जांच में मिला है। अभियोजन पक्ष ने इसे दोनों के बीच कथित वित्तीय संबंध के आधार के तौर पर पेश किया। अदालत के समक्ष 8 लाख रुपये के चेक, OMR कॉपियों और UPI ट्रांजैक्शन सहित अन्य सामग्री का उल्लेख किया गया। इन सभी पहलुओं को देखते हुए जांच एजेंसी मामले से जुड़े वित्तीय लेनदेन और अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
अग्रिम जमानत याचिका खारिज
लालू कुमार यादव की ओर से अदालत में आरोपों का विरोध किया गया। उनके अधिवक्ता ने दलील दी कि लालू न तो JPSC के कर्मचारी हैं और न TDPL के। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि उनके पास से कोई आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई और उन्हें संदेह के आधार पर आरोपी बनाया गया है। हालांकि, अदालत ने केस डायरी में उपलब्ध सामग्री के आधार पर उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। लालू कुमार यादव फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं और CID उनकी तलाश कर रही है




