दिव्यांगता पेंशन मामले में सुप्रीम कोर्ट की केंद्र को फटकार, 271 अपीलें खारिज: कहा- सेवा से संबंध न होने का सबूत देना सरकार की जिम्मेदारी

नई दिल्ली: पूर्व सैनिकों की दिव्यांगता पेंशन से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की 271 अपीलों को खारिज कर दिया है। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने केंद्र की ओर से दायर कई अपीलों में देरी पर भी

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नई दिल्ली: पूर्व सैनिकों की दिव्यांगता पेंशन से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की 271 अपीलों को खारिज कर दिया है। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने केंद्र की ओर से दायर कई अपीलों में देरी पर भी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में यदि सरकार यह दावा करती है कि किसी सैनिक की दिव्यांगता सैन्य सेवा के कारण नहीं हुई या उससे बढ़ी नहीं, तो इसे साबित करने की जिम्मेदारी नियोक्ता यानी सरकार की है।
271 अपीलों पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट के सामने Armed Forces Tribunal और विभिन्न हाई कोर्ट के उन आदेशों को चुनौती देने वाली अपीलें थीं, जिनमें पूर्व सैनिकों को दिव्यांगता पेंशन का लाभ दिया गया था।
पीठ ने कहा कि करीब 271 सिविल अपीलों और स्पेशल लीव पिटीशंस में से बड़ी संख्या समय-सीमा समाप्त होने के कारण पहले ही बाधित थी। कोर्ट ने यह भी कहा कि इसी तरह की कई अपीलें पहले भी लिमिटेशन के आधार पर खारिज हो चुकी हैं।
सरकार की अपीलों पर कोर्ट ने उठाए सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि रक्षा मंत्रालय की एक समिति ने दिव्यांगता और पेंशन से जुड़े लंबित मामलों में अपीलें वापस लेने की सिफारिश की थी। इसके बावजूद ऐसे मामलों में सरकार की ओर से आगे मुकदमेबाजी जारी रही।कोर्ट ने देरी से अपील दायर किए जाने को भी गंभीरता से लिया और कहा कि इस तरह की मुकदमेबाजी का बोझ पूर्व सैनिकों पर पड़ता है।
RTI से सामने आए आंकड़े
पीठ ने RTI के तहत प्राप्त जानकारी का भी उल्लेख किया। इसके अनुसार, पहली अपीलीय अथॉरिटी के सामने कुल 2,997 अपीलें आई थीं। इनमें 2,855 अपीलें खारिज हुईं, जबकि केवल 142 अपीलें स्वीकार की गईं।
दूसरी अपीलीय अथॉरिटी के सामने 456 अपीलें पहुंचीं। इनमें से 439 खारिज हुईं और केवल 17 अपीलें स्वीकार की गईं।
दिव्यांगता सेवा से जुड़ी है या नहीं, सबूत देने की जिम्मेदारी सरकार की
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 2008 के नियमों में कुछ बदलाव किए जाने के बावजूद सरकार पर यह जिम्मेदारी बनी रहती है कि वह साबित करे कि किसी सैनिक की दिव्यांगता सैन्य सेवा से न तो संबंधित है और न ही सेवा के कारण बढ़ी है।
अदालत ने इस आधार पर केंद्र की अपीलों को स्वीकार नहीं किया और संबंधित पूर्व सैनिकों के पक्ष में दिए गए पेंशन संबंधी आदेशों को चुनौती देने वाली अपीलें खारिज कर दीं।
दिव्यांगता पेंशन पर सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले
यह फैसला ऐसे समय आया है जब सुप्रीम कोर्ट ने 2026 में दिव्यांगता पेंशन से जुड़े कई मामलों में पूर्व सैनिकों के अधिकारों और पेंशन के बकाये को लेकर महत्वपूर्ण आदेश दिए हैं। फरवरी 2026 में भी कोर्ट ने कुछ मामलों में दिव्यांगता पेंशन के बकाये को तीन साल तक सीमित करने के फैसले को बरकरार नहीं रखा था।
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