रांची : झारखंड के पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री और कांग्रेस नेता आलमगीर आलम की कानूनी मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े कथित टेंडर घोटाले के मामले में उन्हें सुप्रीम कोर्ट से भी कोई राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागु की पीठ ने आलमगीर आलम की याचिका पर सुनवाई की। शीर्ष अदालत ने झारखंड हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से साफ इनकार करते हुए उन्हें आरोपमुक्त करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। इससे पहले रांची की PMLA विशेष अदालत और झारखंड हाईकोर्ट भी उनकी डिस्चार्ज याचिका खारिज कर चुके थे। अदालत के इस फैसले के बाद अब उनके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।
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ED की जांच में 37.55 करोड़ के अवैध वसूली का आरोप
प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से दाखिल चार्जशीट के अनुसार, ग्रामीण विकास विभाग में निर्माण कार्यों के टेंडर में ठेकेदारों से तय व्यवस्था के तहत कमीशन लिया जाता था। जांच एजेंसी ने इस कथित नेटवर्क के जरिए 37.55 करोड़ रुपये की अवैध वसूली का आरोप लगाया है।
आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर टिकीं नजरें
मामले में आलमगीर आलम पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, आरोपों का होना अपने आप में दोष सिद्ध होना नहीं है। अब आगे की न्यायिक प्रक्रिया में इन आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की जाएगी। इस मामले में आलमगीर आलम की ओर से क्या अंतिम कानूनी रुख अपनाया जाता है, यह भी आगे की कार्यवाही में महत्वपूर्ण रहेगा।




