रांची : डोरंडा स्थित श्री श्वेताम्बर जैन मंदिर में पर्युषण पर्व के चौथे दिन पूजा, प्रवचन, धर्म आराधना और भक्ति कार्यक्रम आयोजित हुए। मुंबई से आए साधर्मी बंधु श्री धैर्य पियूष भाई और तीर्थ धर्मवीर शाह श्रद्धालुओं को धर्म आराधना करवा रहे हैं, जिसमें भक्त उत्साह के साथ शामिल हो रहे हैं। पर्युषण पर्व के चौथे दिन मंदिर परिसर में स्नात्र पूजा हुई। इसके बाद सुबह 7 बजे से 8:30 बजे तक कल्पसूत्र जी की ज्ञान की पांच प्रकार की पूजा की गई।
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कल्पसूत्र का वाचन और प्रवचन
पूजा के बाद सुबह 9 बजे से प्रवचन हुआ। कल्पसूत्र को प्रवचन करने वाले स्वाध्यायी बंधु को अर्पित किया गया और इसके बाद कल्पसूत्र का वाचन किया गया। प्रवचन के दौरान बताया गया कि कल्पसूत्र के रचयिता श्री भद्रबाहु स्वामी थे। उन्होंने उव्वसगहर स्तोत्र की भी रचना की थी। कल्पसूत्र के श्रवण मात्र से जीवन में सुख, शांति, वैभव और अपार लाभ होने की बात प्रवचन में कही गई। यह भी बताया गया कि कल्पसूत्र को पढ़ने का अधिकार साधु को ही है। प्रवचन में आचारांग-सूत्र के बारे में भी जानकारी दी गई। बताया गया कि यह सूत्र आचार और विचार के बारे में मार्गदर्शन देता है। इस दौरान साधु के दस आचारों का वर्णन किया गया, ताकि श्रावकों को यह जानकारी हो सके कि साधुओं के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए। प्रवचन में कल्पसूत्र को शास्त्रों में श्रेष्ठ बताया गया।
भगवान महावीर के पांच कल्याणकों का वर्णन
कार्यक्रम के दौरान कहा गया कि शत्रुंजय तीर्थ में श्रेष्ठ मंत्रों में नवकार, वृक्षों में कल्पवृक्ष और गायों में कामधेनु हैं। इसके बाद भगवान महावीर स्वामी के पांच कल्याणक च्यवन, जन्म, दीक्षा, केवलज्ञान और मोक्ष से जुड़े लग्न और नक्षत्र के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। कार्यक्रम में मुख्य रूप से श्रीलाल सेठिया, विनायक मेहता, धर्मचंद भंसाली, प्रमोद बोथरा, अनिल कोठारी, बालवीर बोथरा, पुष्पा सेठिया और सुनीता बोथरा सहित अन्य लोग मौजूद रहे।





