ISRO का CE20 इंजन टेस्ट सफल, LVM3 की पेलोड क्षमता बढ़ेगी

बेंगलुरु : भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अंतरिक्ष क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। इसरो ने अपने CE20 क्रायोजेनिक इंजन का 220 केएन (kN) के बढ़े हुए थ्रस्ट पर ‘फ्लाइट एक्सेप्टेंस हॉट TEST’ सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इस सफल परीक्षण

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ISRO का CE20 इंजन टेस्ट सफल - (फोटो source - X)

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बेंगलुरु : भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अंतरिक्ष क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। इसरो ने अपने CE20 क्रायोजेनिक इंजन का 220 केएन (kN) के बढ़े हुए थ्रस्ट पर ‘फ्लाइट एक्सेप्टेंस हॉट TEST’ सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इस सफल परीक्षण से एलवीएम3 (LVM3) लॉन्च व्हीकल की पेलोड ले जाने की क्षमता बढ़ेगी, जिससे देश के महत्वाकांक्षी गगनयान प्रोग्राम को आगे बढ़ाने में बड़ी मदद मिलेगी। इसरो ने गुरुवार को जानकारी साझा करते हुए बताया कि यह महत्वपूर्ण हॉट टेस्ट 9 सितंबर को तमिलनाडु के महेंद्रगिरी स्थित इसरो प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स (IPRC) में आयोजित किया गया था।

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C32 अपर स्टेज के लिए तैयार हुआ इंजन

अंतरिक्ष एजेंसी ISRO ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर जानकारी देते हुए कहा कि आगामी LVM3 मिशनों के C32 अपर स्टेज के लिए निर्धारित CE20 क्रायोजेनिक इंजन का 220 kN थ्रस्ट स्तर पर हॉट टेस्ट पूरी तरह सफल रहा। इस दौरान गगनयान मिशन के C32 स्टेज के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए LOX टैंक प्रेशराइजेशन मॉड्यूल (LTPM) का प्रदर्शन भी सफलतापूर्वक आंका गया और उसने मानकों के अनुरूप काम किया।

क्या है CE20 क्रायोजेनिक इंजन की भूमिका?

CE20 इंजन LVM3 लॉन्च व्हीकल के सबसे ऊपरी क्रायोजेनिक स्टेज को पावर प्रदान करता है। ISROभविष्य के भारी एलवीएम3 मिशनों की क्षमता बढ़ाने के लिए CE20 इंजन का उपयोग करते हुए 22-टन थ्रस्ट वाले अपग्रेडेड C32 स्टेज को विकसित कर रहा है। इससे पहले मार्च में भी महेंद्रगिरी में 22 टन थ्रस्ट स्तर पर समुद्र तल (Sea Level) पर इस इंजन का हॉट टेस्ट किया गया था, जिसमें नोजल प्रोटेक्शन सिस्टम और मल्टी-एलिमेंट इग्नाइटर का उपयोग हुआ था।

कठिन परीक्षणों को पार कर बढ़ा गगनयान का कदम

समुद्र-स्तर पर CE20 इंजन के हाई-एरिया-रेशियो नोजल का परीक्षण करना काफी चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि कम एग्जिट प्रेशर के कारण नोजल में जबरदस्त वाइब्रेशन और थर्मल स्ट्रेस पैदा होने का खतरा रहता है। हालांकि, हालिया सफल उड़ान स्वीकृति परीक्षण ने अपग्रेडेड C32 स्टेज को जल्द परिचालन में लाने का रास्ता साफ कर दिया है। गौरतलब है कि यह उपलब्धि 5 सितंबर को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से GSLV-F17 के माध्यम से अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट (EOS-05) के सफल प्रक्षेपण के तुरंत बाद आई है।

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