दिल्ली छात्र आंदोलन पर UN की तारीफ, वोल्कर तुर्क ने बताई बातचीत की ताकत

जिनेवा/नई दिल्ली : दिल्ली में पेपर लीक के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में हुए छात्र आंदोलन को केंद्र सरकार द्वारा बातचीत से सुलझाने के तरीके की संयुक्त राष्ट्र (UN) ने खुलकर तारीफ की है। जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के

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जिनेवा/नई दिल्ली : दिल्ली में पेपर लीक के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में हुए छात्र आंदोलन को केंद्र सरकार द्वारा बातचीत से सुलझाने के तरीके की संयुक्त राष्ट्र (UN) ने खुलकर तारीफ की है। जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 63वें सत्र को संबोधित करते हुए संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने भारत की इस प्रतिक्रिया को विश्व के लिए एक आदर्श मॉडल बताया।

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“बल प्रयोग से ज्यादा असरदार है बातचीत का रास्ता”

वोल्कर तुर्क ने वैश्विक मंच से भारत का उदाहरण देते हुए कहा कि सरकारों को सार्वजनिक विरोध प्रदर्शनों और युवाओं के आंदोलनों पर कैसा रुख अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा, “भारत में हाल ही के छात्र आंदोलन ने यह साबित किया है कि सबसे बेहतर प्रतिक्रिया युवा नेताओं के साथ सीधी बातचीत करना है, न कि बल का अत्यधिक इस्तेमाल। शांतिपूर्ण विरोध, अभिव्यक्ति की आजादी और मौलिक अधिकार सरकारों और नागरिकों के बीच भरोसा कायम करने के लिए बेहद जरूरी हैं।” उल्लेखनीय है कि दिल्ली में सीजेपी नेताओं के साथ केंद्र सरकार की सकारात्मक वार्ता के बाद तीन मुख्य मांगे मान ली गई थीं, जिसके बाद छात्रों ने अपना आंदोलन समाप्त कर दिया था।

पाकिस्तान, चीन और ईरान की दमनकारी नीतियों की आलोचना

अपने संबोधन के दौरान तुर्क ने पड़ोसी देश पाकिस्तान और चीन की मानवाधिकार विरोधी नीतियों पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में अधिकारियों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को दबाने के लिए अत्यधिक घातक बल प्रयोग किया और लोगों को मनमाने ढंग से हिरासत में लिया। वहीं, चीन के संदर्भ में उन्होंने तिब्बती समुदाय के धार्मिक अधिकारों पर बढ़ती पाबंदियों और राष्ट्रीय सुरक्षा कानूनों के दुरुपयोग पर गंभीर चिंता जताते हुए नीतियों में तुरंत बदलाव की मांग की।

कई देशों में मीडिया और अभिव्यक्ति की आजादी पर संकट

तुर्क ने ईरान में राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर दी जा रही फांसी की सजाओं और निकारागुआ, रूस, अजरबैजान, जॉर्जिया, ट्यूनीशिया तथा युगांडा में मीडिया व राजनीतिक विरोध को दबाने के प्रयासों की भी कड़ी आलोचना की। यूएन प्रमुख के इस वक्तव्य ने भारत को उन देशों से पूरी तरह अलग और एक परिपक्व लोकतांत्रिक देश के रूप में स्थापित किया है, जहां असहमति का समाधान संवाद से निकाला जाता है।

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