रांची : पहाड़ी मंदिर के समीप स्थित श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर मंदिर में शुक्रवार को देवकीनंदन भगवान श्रीकृष्ण की जयंती के अवसर पर श्रीकृष्ण प्राकट्य महोत्सव भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। शास्त्रीय विधान के तहत ब्रह्ममुहूर्त से अर्धरात्रि तक विभिन्न अनुष्ठान, भजन-कीर्तन, श्रीविष्णु सहस्त्रनाम और श्रीकृष्ण स्तोत्रों का पाठ हुआ। मंदिर परिसर जय-जयकार, घंटानाद और हरिनाम संकीर्तन के स्वरों से गूंजता रहा। पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।
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भगवान श्रीवेंकटेश का हुआ महाभिषेक
प्रातः 4:30 बजे भगवान श्रीवेंकटेश, श्रीश्रीदेवी एवं श्रीभूमिदेवी सहित आयुधवर चक्रराज सुदर्शन जी का दूध, दधि और अन्य औषधीय द्रव्यों से महाभिषेक किया गया। इसके बाद वस्त्र और आभूषणों से अलंकृत कर सुवासित पुष्पों से भव्य श्रृंगार निवेदन किया गया। इसके बाद सजे-धजे झूले पर भगवान श्रीवेंकटेश को श्रीकृष्ण रूप में, श्रीश्रीदेवी को रुक्मिणी स्वरूप में तथा श्रीभूमिदेवी को राधिका स्वरूप में विराजमान कराया गया। फलाहार व्यंजनों का बालभोग निवेदित करने के बाद मंत्रोच्चार के साथ महाआरती और महास्तुति की गई। झूले पर विराजमान भगवान और भगवती के दर्शन कर श्रद्धालु भाव-विभोर नजर आए।
हरिनाम संकीर्तन और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ
रात्रि 8 बजे से श्रीकृष्ण हरिनाम संकीर्तन और भजनों का आयोजन हुआ। इसके बाद सामूहिक रूप से श्रीविष्णु सहस्त्रनाम का पाठ किया गया। रात्रि 9 बजे से भगवान की आराधना, षोडशोपचार पूजा, नैवेद्य भोग, आरती और स्तुति का आयोजन हुआ। मंदिर परिसर देर रात तक भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा।
अर्चकों ने विधि-विधान से संपन्न कराए अनुष्ठान
मंदिर के अर्चक श्री सत्यनारायण गौतम, श्री श्री गोपेश आचार्य और श्री नारायण दास ने सभी अनुष्ठानिक कार्यक्रमों को विधिवत संपन्न कराया। कार्यक्रम में राम अवतार नारसरिया, अनूप अग्रवाल, प्रदीप नारसरिया, रंजन सिंह, प्रकाश मोदी, रश्मि मोदी, प्रदीप मोदी आदि उपस्थित रहे।




