रांची : झारखंड में DGP नियुक्ति को लेकर राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट (SC) में विस्तृत अनुपालन शपथ पत्र दाखिल किया है। गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अवर सचिव अनिल कुमार तिर्की की ओर से 14 अगस्त 2026 को दाखिल हलफनामे में स्थायी DGP की नियुक्ति, वर्ष 2025 में बनाई गई नियमावली और UPSC के साथ हुए पत्राचार का सिलसिलेवार विवरण दिया गया है। सरकार ने यह हलफनामा बाबूलाल मरांडी बनाम झारखंड राज्य (TC(C) No. 141/2025) मामले के संदर्भ में दाखिल किया है। इसमें DGP चयन की पृष्ठभूमि, प्रशासनिक परिस्थितियों और राज्य सरकार की ओर से उठाए गए कदमों का उल्लेख किया गया है।
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जुलाई 2024 से शुरू हुई DGP नियुक्ति की प्रक्रिया
हलफनामे के मुताबिक, जुलाई 2024 में तत्कालीन DGP अजय कुमार सिंह ने पद पर बने रहने में अनिच्छा जताई थी। इसके बाद राज्य सरकार ने 25 जुलाई 2024 को अधिसूचना संख्या 4546/4547 जारी कर तत्कालीन CID प्रमुख अनुराग गुप्ता को DGP का अतिरिक्त प्रभार सौंपा। नियमित DGP के चयन के लिए 15 सितंबर 2024 को राज्य सरकार ने UPSC को नया पैनल भेजने का प्रस्ताव दिया। इसके जवाब में UPSC ने 3 अक्टूबर 2024 को अजय कुमार सिंह को कार्यकाल पूरा होने से पहले मुक्त किए जाने के कारणों पर स्पष्टीकरण मांगा। राज्य सरकार ने 15 अक्टूबर 2024 को जवाब देते हुए कहा कि अजय कुमार सिंह ने व्यक्तिगत कारणों से स्थानांतरण की मांग की थी। साथ ही सरकार ने UPSC से दोबारा पैनल तैयार करने का अनुरोध किया।
चुनाव के दौरान बदला DGP का प्रभार
15 अक्टूबर 2024 को चुनाव की घोषणा के बाद निर्वाचन आयोग के निर्देश पर अनुराग गुप्ता को DGP के प्रभार से मुक्त कर अजय कुमार सिंह को फिर से DGP बनाया गया। विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद 28 नवंबर 2024 को सरकार ने अनुराग गुप्ता को दोबारा कार्यवाहक DGP का प्रभार सौंप दिया। इसके बाद 4 दिसंबर 2024 को UPSC ने पहले उठाए गए सवालों को फिर दोहराया। राज्य सरकार ने 11 दिसंबर 2024 को योग्य अधिकारियों का बायोडेटा UPSC को भेजते हुए जल्द पैनल तैयार करने का आग्रह किया।
UPSC से पैनल नहीं मिलने पर बनी 2025 की नियमावली
राज्य सरकार के हलफनामे के अनुसार, सितंबर से दिसंबर 2024 के बीच बार-बार अनुरोध के बावजूद नियमित DGP के लिए UPSC से पैनल नहीं मिलने पर प्रशासनिक शून्यता से बचने के लिए राज्य ने अपनी नियमावली बनाने का फैसला किया। 8 जनवरी 2025 को राज्य सरकार ने सामान्य खंड अधिनियम, 1897 की धारा 21 और पुलिस अधिनियम, 1861 की धारा 46 के तहत ‘झारखंड (पुलिस बल प्रमुख) चयन और नियुक्ति नियमावली, 2025’ बनाई। इससे पहले 7 जनवरी 2025 को राज्य कैबिनेट ने नियमावली को मंजूरी दी थी। 16 जनवरी 2025 को हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में छह सदस्यीय चयन समिति गठित की गई। अगले दिन 17 जनवरी को UPSC ने पत्र भेजकर समिति की बैठकों में शामिल होने से इनकार कर दिया। 21 जनवरी 2025 को चयन समिति ने तीन अधिकारियों का पैनल राज्य सरकार को सौंपा। इसी पैनल के आधार पर 2 फरवरी 2025 को अनुराग गुप्ता को नियमित DGP नियुक्त किया गया।
तदाशा मिश्रा बनीं राज्य की पहली महिला DGP
अनुराग गुप्ता के 6 नवंबर 2025 को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के बाद तदाशा मिश्रा को कार्यवाहक DGP बनाया गया। 12 नवंबर 2025 को उन्हें DG रैंक में पदोन्नत किया गया। हलफनामे के अनुसार, 158 IPS कैडर वाले झारखंड में पांच वरिष्ठ अधिकारी केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर थे। योग्य अधिकारियों की पर्याप्त संख्या सुनिश्चित करने के लिए नियमावली के नियम 5(c) में संशोधन कर अनुभव की न्यूनतम सीमा 30 वर्ष की गई। 30 दिसंबर 2025 को संशोधित नियमावली के तहत गठित समिति की सिफारिश के आधार पर तदाशा मिश्रा को नियमित DGP नियुक्त किया गया। वह झारखंड की पहली महिला पुलिस प्रमुख बनीं।
सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने क्या तर्क दिए?
राज्य सरकार ने SC के समक्ष कहा है कि कानून बनाने की शक्ति विधायिका के पास है। सरकार के मुताबिक, प्रकाश सिंह मामले में तय सिद्धांतों का पालन करते हुए और आपात परिस्थितियों में राज्य ने अपने कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल कर DGP चयन और नियुक्ति के लिए नियमावली बनाई। सरकार ने संवेदनशील पदों पर राज्य सरकार के विश्वास की आवश्यकता को लेकर ईपी रायप्पा और सलिल सबलोक मामलों का भी हवाला दिया है। हलफनामे में राज्य सरकार ने नई व्यवस्था के तहत वर्ष 2026 में नक्सल विरोधी अभियानों में मिली सफलताओं का भी उल्लेख किया है। इसमें 103 नक्सलियों की गिरफ्तारी, 22 नक्सलियों के खात्मे, इनामी अपराधियों की गिरफ्तारी और संगठित गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई का दावा किया गया है। हलफनामे के अंत में राज्य सरकार ने SC से आवश्यकतानुसार अतिरिक्त दस्तावेज या शपथ पत्र दाखिल करने की अनुमति देने का अनुरोध किया है।




