रांची: माननीय झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति-सह-कार्यपालक अध्यक्ष, झालसा, सुजीत नारायण प्रसाद के दिशा-निर्देश तथा माननीय सदस्य सचिव, झालसा, कुमारी रंजना अस्थाना एवं न्यायायुक्त-सह-अध्यक्ष, डालसा, रांची, अनिल कुमार मिश्रा के मार्गदर्शन में 22 अगस्त 2026 को ओरमांझी प्रखंड में विधिक जागरूकता-सह-मध्यस्थता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन डालसा सचिव के नेतृत्व में किया गया। इसमें डिप्टी एलएडीसी राजेश कुमार सिन्हा, सीसीएल अधिकारी जॉन बोदरा, एनयूएसआरएल के फैकल्टी डॉ. शंतानु ब्रज चौबे, डॉ. श्वेता मोहन, प्रोजेक्ट को-ऑर्डिनेटर शिव नारायण, पीएलवी आशीष बैठा, किरण कुमारी, दीपक गंझू, जगमोहन मुंडा, रानी देवी, रामजीत महतो, सरिता देवी और दिनेश महतो सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
न्याय हर व्यक्ति की पहुंच में होना चाहिए: राजेश कुमार सिन्हा
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डिप्टी एलएडीसी राजेश कुमार सिन्हा ने कहा कि न्याय समाज के प्रत्येक व्यक्ति की पहुंच में होना चाहिए। इसी उद्देश्य से डालसा, रांची की ओर से ओरमांझी प्रखंड में विधिक जागरूकता-सह-मध्यस्थता कार्यक्रम आयोजित किया गया है। उन्होंने ग्रामीणों को जिला विधिक सेवा प्राधिकार, रांची द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली निःशुल्क विधिक सहायता के बारे में जानकारी दी। साथ ही, डालसा के माध्यम से कार्यरत पैरा लीगल वॉलंटियर्स (पीएलवी) की भूमिका और उनके कार्यों के बारे में भी विस्तार से बताया।
मध्यस्थता से समय और धन दोनों की बचत
राजेश कुमार सिन्हा ने कहा कि छोटे-बड़े विवादों के समाधान के लिए मध्यस्थता सरल, प्रभावी और समय व धन की बचत करने वाला माध्यम है। इसके जरिए पक्षकार अनावश्यक मुकदमेबाजी और मानसिक तनाव से बच सकते हैं। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे पारिवारिक विवाद, भूमि संबंधी विवाद और समझौता योग्य मामलों को मध्यस्थता के माध्यम से सुलझाने के लिए डालसा, रांची की सहायता लें।
‘न्याय सेतु’ परियोजना की दी गई जानकारी
सीसीएल अधिकारी जॉन बोदरा ने एनयूएसआरएल के साथ ‘न्याय सेतु’ परियोजना के तहत किए जा रहे कार्यों की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता सरल, सुलभ और त्वरित न्याय प्राप्त करने का प्रभावी माध्यम है। इसके जरिए विवादों का सौहार्दपूर्ण समाधान संभव है। एनयूएसआरएल के फैकल्टी डॉ. शंतानु ब्रज चौबे ने ग्रामीणों से अपनी समस्याओं को सामने रखने और उनके समाधान के लिए आवेदन प्रस्तुत करने का आग्रह किया।कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने अपनी विभिन्न समस्याओं से संबंधित आवेदन भी जमा किए। इन आवेदनों पर आवश्यक विधिक सहायता और समाधान के लिए आगे की कार्रवाई की जाएगी।
ग्रामीणों को कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करना उद्देश्य
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को उनके कानूनी अधिकारों, निःशुल्क विधिक सहायता और मध्यस्थता के माध्यम से विवादों के त्वरित एवं सौहार्दपूर्ण समाधान के प्रति जागरूक करना रहा। आयोजकों ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों के जरिए ग्रामीणों तक न्याय व्यवस्था और कानूनी सहायता की जानकारी पहुंचाने के साथ उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।




