बीजिंग, चीन : चीन के पूर्व प्रधानमंत्री झू रोंगजी का मंगलवार को राजधानी बीजिंग में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (सीपीसी) और देश के शीर्ष नेताओं ने बाबाओशान रिवोल्यूशनरी कब्रिस्तान पहुंचकर उन्हें अंतिम विदाई दी।झू रोंगजी के निधन के बाद बीजिंग में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। सरकार ने महत्वपूर्ण स्थानों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुकाकर उनके निधन पर औपचारिक शोक जताया। सिन्हुआ के अनुसार, 98 वर्षीय झू रोंगजी का निधन 12 अगस्त को हुआ था। वह 1998 से 2003 तक चीन के प्रधानमंत्री रहे। उन्हें चीन में आर्थिक सुधारों के दौर के प्रभावशाली नेताओं में गिना जाता है।
आर्थिक सुधारों में निभाई अहम भूमिका
झू रोंगजी के प्रधानमंत्री कार्यकाल में सरकारी कंपनियों के पुनर्गठन, बैंकिंग और कर व्यवस्था में सुधार तथा महंगाई पर नियंत्रण के लिए कई बड़े कदम उठाए गए। चीन के विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में शामिल होने की प्रक्रिया में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था को वैश्विक बाजार से जोड़ने और आर्थिक ढांचे में बदलाव की दिशा में कई फैसले लिए गए। मंगलवार को तियानआनमेन स्क्वायर और बाबाओशान श्मशान घाट की ओर जाने वाले मार्गों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। बाबाओशान चीन के शीर्ष नेताओं के अंतिम संस्कार के लिए प्रमुख स्थलों में शामिल है।
बेबाक अंदाज के लिए भी याद किए जाते हैं
झू रोंगजी अपनी स्पष्ट और बेबाक शैली के लिए भी लोकप्रिय रहे। आर्थिक सुधारों के दौरान उन्होंने सरकारी क्षेत्र में बड़े बदलाव किए, जिनका असर रोजगार पर भी पड़ा और लाखों लोगों की नौकरियां गईं। इसके बावजूद चीन के आर्थिक आधुनिकीकरण और वैश्विक अर्थव्यवस्था से देश के जुड़ाव में उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण माना जाता है। उनके निधन के बाद चीनी सोशल मीडिया पर लोगों ने उनके पुराने भाषणों और आर्थिक सुधारों को याद किया।कई लोगों ने उनके कार्यकाल को आर्थिक बदलाव और अपेक्षाकृत अधिक खुली सार्वजनिक चर्चा के दौर के रूप में याद किया। हालांकि, अधिकारियों ने सार्वजनिक शोक की गतिविधियों को नियंत्रित रखा और ऑनलाइन गतिविधियों पर भी नजर रखी। उनके पैतृक गांव में श्रद्धांजलि देने से जुड़ी गतिविधियों पर निगरानी की खबरें भी सामने आईं।
चीन में वरिष्ठ नेताओं की मृत्यु के बाद सार्वजनिक प्रतिक्रिया को लेकर सरकार विशेष रूप से सतर्क रहती है। अतीत में नेताओं की मृत्यु के बाद हुआ व्यापक सार्वजनिक शोक कई बार राजनीतिक असंतोष में बदल चुका है। 1976 में प्रधानमंत्री झोउ एनलाई की मृत्यु के बाद हुआ सार्वजनिक शोक इसका प्रमुख ऐतिहासिक उदाहरण है।वहीं, 2023 में पूर्व प्रधानमंत्री ली केकियांग की मृत्यु के बाद भी अधिकारियों ने ऑनलाइन श्रद्धांजलियों और सार्वजनिक गतिविधियों पर नियंत्रण रखा था।








