देवघर। सावन की आस्था में जब भक्ति का रंग चढ़ता है, तो कांवरिया भी कुछ ऐसा कर गुजरते हैं, जो लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लेता है। मुंगेर के कच्ची कांवरिया पथ पर इन दिनों ऐसी ही एक अनोखी कांवर आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। कोलकाता से आए शिव भक्त 110 किलो वजनी बाबा भोलेनाथ की विशाल प्रतिमा को कांवर का रूप देकर बाबा बैद्यनाथ धाम की यात्रा पर निकले हैं।
इस विशाल कांवर को तैयार करने में करीब दो महीने का समय लगा है। मुंगेर के कच्ची कांवरिया पथ पर केसरिया वस्त्रों में कांवरियों का जत्था आगे बढ़ रहा है। उनके कंधों पर बाबा भोलेनाथ की विशाल प्रतिमा के स्वरूप वाली कांवर सजी हुई है। कोलकाता से आए करीब 60 शिव भक्तों का यह जत्था सुल्तानगंज से गंगाजल भरकर बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर बढ़ रहा है। करीब 110 किलो वजनी इस अनोखी कांवर को देखने के लिए रास्ते में लोगों की भीड़ जुट रही है।
कांवर को प्लास्टर ऑफ पेरिस, फोम, कपड़े और आकर्षक सजावटी सामग्री का इस्तेमाल कर तैयार किया गया है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि देखने पर कांवर में बाबा भोलेनाथ की भव्य प्रतिमा नजर आती है। इस विशाल कांवर को एक साथ चार कांवरिया अपने कंधों पर उठाकर चलते हैं। जत्थे में शामिल शिव भक्त बारी-बारी से कांवर को उठाकर अपनी यात्रा पूरी कर रहे हैं।
कांवर का वजन भले ही 110 किलो है, लेकिन भक्तों की आस्था और उत्साह के आगे यह वजन भी छोटा नजर आ रहा है। कांवड़ियों के मुताबिक, वे पिछले कई वर्षों से अलग-अलग तरह की अनोखी कांवर तैयार कर बाबा बैद्यनाथ धाम की यात्रा करते आ रहे हैं। इस बार उन्होंने बाबा भोलेनाथ की विशाल प्रतिमा को ही कांवर का रूप देने का फैसला किया।
सावन की कांवड़ यात्रा सिर्फ जल चढ़ाने की परंपरा नहीं, बल्कि आस्था, संकल्प और भक्ति का संगम भी है। कठिन रास्तों और लंबी दूरी के बावजूद शिव भक्तों का उत्साह कम नहीं होता। 110 किलो की इस विशाल कांवर के साथ कोलकाता के ये शिव भक्त भी संकल्प लेकर आगे बढ़ रहे हैं कि सुल्तानगंज से उठाया गया गंगाजल बाबा बैद्यनाथ के चरणों तक पहुंचाने के बाद ही उनकी यात्रा पूरी होगी।



