लखनऊ : सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को उनके सरकारी आवास पर हुई कैबिनेट की बैठक में 29 में से 27 प्रस्तावों को मंजूरी दे दी गई। बैठक में शाहजहांपुर के जलालाबाद कस्बे का नाम बदलकर परशुराम पुरी करने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति मिल गई। इसके अलावा उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026 को भी कैबिनेट की मंजूरी मिली।
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कैबिनेट के फैसले के अनुसार शाहजहांपुर नगर पालिका परिषद के अंतर्गत आने वाले जलालाबाद कस्बे का आधिकारिक नाम अब परशुराम पुरी होगा। इस प्रस्ताव को नगर पालिका परिषद ने पहले ही पारित कर राज्य सरकार को भेजा था।
2018 में शुरू हुई थी नाम बदलने की प्रक्रिया
जलालाबाद का नाम बदलने की प्रक्रिया मार्च 2018 में शुरू हुई थी। इसके बाद सितंबर 2023 में शाहजहांपुर नगर पालिका परिषद की बोर्ड बैठक में भी प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। तत्कालीन जिलाधिकारी ने अपनी संस्तुति के साथ इसे प्रदेश सरकार को भेजा, जिसके बाद राज्य सरकार ने प्रस्ताव केंद्र सरकार को अग्रसारित किया। केंद्र सरकार ने 20 अगस्त 2025 को नाम परिवर्तन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी। अब उत्तर प्रदेश कैबिनेट की स्वीकृति मिलने के बाद इस प्रक्रिया को अंतिम रूप मिल गया है।
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भगवान परशुराम की जन्मस्थली माना जाता है क्षेत्र
कई पौराणिक ग्रंथों में इस क्षेत्र का उल्लेख भगवान परशुराम की जन्मस्थली के रूप में किया गया है। यहां भगवान परशुराम का एक प्राचीन मंदिर भी स्थित है। वर्ष 2022 में उत्तर प्रदेश सरकार ने इस स्थान को आधिकारिक रूप से भगवान परशुराम की जन्मभूमि घोषित किया था। जलालाबाद नाम को लेकर भी अलग-अलग मत प्रचलित हैं। एक मान्यता के अनुसार मुगल बादशाह जलालुद्दीन अकबर के सम्मान में इस कस्बे का नाम जलालाबाद रखा गया था।
स्टार्टअप नीति-2026 को भी मिली मंजूरी
कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026 को भी मंजूरी दी। अगले पांच वर्षों तक प्रभावी रहने वाली इस नीति का उद्देश्य प्रदेश में नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना, युवाओं को उद्यमिता के लिए प्रोत्साहित करना और निवेश व रोजगार के नए अवसर सृजित करना है।
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नई नीति में हाईटेक और डीप-टेक क्षेत्रों पर विशेष जोर दिया गया है। इसके तहत स्टार्टअप को शुरुआती चरण से लेकर विस्तार तक वित्तीय और संस्थागत सहयोग उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है।




