धनतेरस पर रांची के वेंकटेश्वर मंदिर में भगवान का महाभिषेक

रांची : धनतेरस और धन्वंतरि जयंती के अवसर पर शुक्रवार को राजधानी रांची के रातू रोड स्थित श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर मंदिर (श्रीतिरुपति बालाजी) में भगवान का महाभिषेक किया गया। दैनिक पूजा के बाद उद्यास्तमन सेवा के तहत भगवान को स्वर्ण कवच धारण कराया गया। इसके बाद

वेंकटेश्वर मंदिर

अपनी भाषा में पढ़ें

रांची : धनतेरस और धन्वंतरि जयंती के अवसर पर शुक्रवार को राजधानी रांची के रातू रोड स्थित श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर मंदिर (श्रीतिरुपति बालाजी) में भगवान का महाभिषेक किया गया। दैनिक पूजा के बाद उद्यास्तमन सेवा के तहत भगवान को स्वर्ण कवच धारण कराया गया। इसके बाद दिव्य वस्त्रों और आभूषणों से उनका श्रृंगार किया गया। पूजा के दौरान मुद्राएं प्रदर्शित की गईं। भगवान को चंवर, दर्पण और पंखा झलने के साथ पोंगल, खीर, फल और मेवे का नैवेद्य अर्पित किया गया। निराजन आरती के बाद श्रुति, उपनिषद और देशिक स्तोत्रों से भगवान की महास्तुति की गई।

Read More : दिल्ली के कार शोरूम में आग से मची अफरा-तफरी, कई लग्जरी कारें जलीं

उद्यास्तमन सेवा के यजमान श्री सज्जन सर्राफ और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती किरण सर्राफ रहे। वहीं, महाभिषेक (तिरुमंजन) के यजमान श्री संजय चौधरी और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती सुनीता चौधरी बने। दोनों यजमान परिवार रांची के निवासी हैं।

त्रयोदशी से दीपावली तक होंगे विशेष अनुष्ठान

मंदिर में त्रयोदशी से लेकर दीपावली तक भगवान के लिए विशेष महोत्सव आयोजित किए जा रहे हैं। दीपावली से पहले पड़ने वाली चतुर्दशी को लेकर मान्यता है कि उस दिन तेल में लक्ष्मी और जल में गंगा का निवास होता है। इसी मान्यता के अनुसार चतुर्दशी को भगवान के विग्रह को तेल और इत्र से स्नान कराया जाएगा। इस दिन सुबह स्नान कर भगवान पापविनाशन श्रीहरि के दर्शन और पूजा करने का विधान बताया गया है। भगवान के विग्रह पर मार्जन किए गए तेल को आशीर्वाद स्वरूप सिर पर धारण करने की भी परंपरा है। मान्यता है कि ऐसा करने वाले व्यक्ति को नरक का भय नहीं रहता।

दीपावली पर हजारों दीपक जलाकर मनेगा दीपोत्सव

मंदिर की ओर से बताया गया कि कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को यदि अमावस्या और स्वाति नक्षत्र का योग बनता है, तो उसी दिन दीपावली मनाई जाती है। दीपावली के अवसर पर मंदिर में विशेष पूजा-अनुष्ठान और महाभिषेक किया जाएगा। भगवान को दिव्य श्रृंगार अर्पित करने के बाद रात में हजारों दीपक जलाकर दीपोत्सव मनाया जाएगा। मंदिर को विद्युत लड़ियों से सजाया गया है और वह अभी से जगमगा रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इन तीन दिनों के लिए राजा बलि ने भगवान विष्णु से वरदान मांगा था। उन्होंने कहा था कि वामन रूप धारण कर भगवान ने तीन पगों में तीनों लोकों को नाप लिया है। इसलिए प्रतिवर्ष इन तीन दिनों तक पृथ्वी पर मनुष्य दीपदान और दीपोत्सव मनाएं तथा उनके घरों में भगवान की पत्नी श्रीलक्ष्मी स्थिर भाव से निवास करें।

WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉 Join Now
Facebook
X
Threads
WhatsApp
Telegram
संबंधित खबरें.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *