पलामू टाइगर रिजर्व में फिर गूंजेगी बाघों की दहाड़, 2 बाघिन और 1 बाघ लाने की तैयारी

पलामू। झारखंड के इकलौते पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) का खोया हुआ गौरव लौटाने के लिए वन विभाग ने कमर कस ली है। कभी बाघों की मौजूदगी के लिए पहचान रखने वाले इस जंगल में अब एक बार फिर बाघों का कुनबा बसाने की तैयारी हो

बाघों की दहाड़

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पलामू। झारखंड के इकलौते पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) का खोया हुआ गौरव लौटाने के लिए वन विभाग ने कमर कस ली है। कभी बाघों की मौजूदगी के लिए पहचान रखने वाले इस जंगल में अब एक बार फिर बाघों का कुनबा बसाने की तैयारी हो रही है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के बाघ पुनर्वास और स्थानांतरण कार्यक्रम के तहत रिजर्व में जल्द ही दो बाघिन और एक बाघ लाने की योजना है। इसके लिए वन विभाग सुरक्षा, भोजन और अनुकूल वातावरण तैयार करने में जुटा है।

सरिस्का और पन्ना मॉडल पर फिर बसेगा बाघों का कुनबा

पलामू टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए देश के अन्य टाइगर रिजर्व में सफल रहे पुनर्वास मॉडल को अपनाने की तैयारी है। राजस्थान के सरिस्का और मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व में एक समय बाघों की संख्या शून्य हो गई थी। दूसरे क्षेत्रों से बाघों को लाकर वहां दोबारा इनकी आबादी स्थापित करने की कोशिश की गई।

इसी तर्ज पर पीटीआर में भी बाघों को बसाने की योजना बनाई गई है। इस संबंध में प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) रवि रंजन, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (नोडल) एटी मिश्रा और आईएफएस राजकुमार बाजपेयी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने क्षेत्र निदेशक एसआर नटेश के साथ रिजर्व के सुदूरवर्ती इलाकों का दौरा कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

कभी 50 से अधिक थे बाघ, 2018 में संख्या हो गई थी शून्य

पलामू टाइगर रिजर्व का इतिहास बाघों की मौजूदगी के लिहाज से काफी समृद्ध रहा है। वर्ष 1973-74 में देश में प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत के समय यहां 50 से अधिक बाघ मौजूद थे। लेकिन समय के साथ नक्सली गतिविधियों, अवैध शिकार और मानवीय हस्तक्षेप के कारण इनकी संख्या लगातार घटती गई। वर्ष 2018 की बाघ गणना में रिजर्व में एक भी बाघ दर्ज नहीं किया गया।

बाघों की अनुपस्थिति के कारण पीटीआर की पहचान और पर्यटन गतिविधियों पर भी असर पड़ा। अब वन विभाग इस स्थिति को बदलने के लिए व्यापक स्तर पर प्रयास कर रहा है।

1129 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में सुरक्षा का हाईटेक इंतजाम

बाघों के पुनर्वास से पहले उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना वन विभाग की प्राथमिकता है। करीब 1129 वर्ग किलोमीटर में फैले रिजर्व में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जा रही है। शिकारियों और वन्यजीव तस्करी से जुड़े लोगों पर निगरानी बढ़ाई गई है। विभाग के अनुसार, वन्यजीव अपराधों में शामिल कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है।

जंगल में अनधिकृत प्रवेश करने वालों पर भी कानूनी कार्रवाई की तैयारी है, ताकि नए बाघों को सुरक्षित प्राकृतिक वातावरण मिल सके।

बाघों के भोजन के लिए बढ़ाई जाएगी शाकाहारी वन्यजीवों की संख्या

नए बाघों को जंगल में पर्याप्त भोजन मिल सके, इसके लिए रिजर्व प्रबंधन ने शाकाहारी वन्यजीवों के संरक्षण पर भी ध्यान दिया है। जंगल में इनके लिए चारा और पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। शाकाहारी जीवों की संख्या बढ़ने से बाघों के लिए प्राकृतिक शिकार का आधार मजबूत होगा।

रेलवे ट्रैक डायवर्ट करने की तैयारी, रात में वाहनों की आवाजाही पर रोक

वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए टाइगर रिजर्व के बीच से गुजरने वाले रेलवे ट्रैक को डायवर्ट करने की तैयारी की जा रही है। इसके अलावा पीटीआर के अंतर्गत आने वाली सड़कों पर रात के समय वाहनों के परिचालन पर रोक लगा दी गई है।

ऐतिहासिक पलामू किला परिसर की संवेदनशीलता को देखते हुए वहां बाइक और चारपहिया वाहनों के प्रवेश पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। इन उपायों का उद्देश्य वन्यजीवों के लिए कम से कम मानवीय हस्तक्षेप वाला सुरक्षित वातावरण तैयार करना है।

पर्यटन और स्थानीय रोजगार को मिलेगी नई रफ्तार

वन विभाग की इस पहल से पलामू में पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। यदि बाघों का पुनर्वास सफल रहता है, तो वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों की आवाजाही बढ़ सकती है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होने के साथ पर्यटन से जुड़े राजस्व में भी वृद्धि की संभावना है।

पीटीआर का पुराना गौरव लौटाना प्राथमिकता: एसआर नटेश

मुख्य वन संरक्षक सह पलामू टाइगर रिजर्व के क्षेत्र निदेशक एसआर नटेश ने कहा कि पीटीआर के ऐतिहासिक गौरव को वापस लौटाना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। बाघों का कुनबा बढ़ाने के लिए जरूरी सुरक्षा और आधारभूत सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।

उन्होंने बताया कि बाहर से लाए जाने वाले बाघों के अनुकूल वातावरण तैयार करने के लिए सुरक्षा तंत्र को मजबूत किया जा रहा है। शिकारियों पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि नए बाघों को पर्याप्त भोजन और सुरक्षित आवास मिल सके।

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