देवघर/साहिबगंज : देवघर और साहिबगंज में आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को हिंदू धर्म में जितिया पर्व मनाया जा रहा है। यह पर्व माताओं के लिए विशेष महत्व रखता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, माताएं अपनी संतानों की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य की कामना के लिए जितिया व्रत करती हैं। 3 दिनों तक चलने वाले इस पर्व में नहाय-खाय, निर्जला व्रत और पारण की परंपरा निभाई जाती है।
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नहाय खाय से हुई पर्व की शुरुआत
शुक्रवार से जितिया पर्व के नहाय-खाय की शुरुआत हो गई है। देवघर में जितिया पर्व को लेकर श्रद्धा और उत्साह का माहौल देखा जा रहा है। बाबा धाम परिसर से लेकर शहर के बाजारों तक इस पर्व को लेकर चहल-पहल बढ़ गई है। महिलाएं पूजा-पाठ और व्रत से संबंधित सामग्री की खरीदारी करती नजर आ रही हैं।
राजा जीमूतवाहन की कथा और महत्व
जितिया पर्व को लेकर बाबा धाम के पुजारी प्रमोद शृंगारी बताते हैं कि पौराणिक कथाओं में इस व्रत का संबंध राजा जीमूतवाहन की करुणा, त्याग और दयालुता से बताया गया है। एक अन्य पौराणिक कथा के मुताबिक, राजा जीमूतवाहन ने गरुड़ से एक मां के बेटे की रक्षा के लिए खुद अपने प्राणों को संकट में डालने का निर्णय लिया था। राजा के इस त्याग और मातृ-प्रेम को देखते हुए गरुड़ ने आशीर्वाद दिया कि कृष्ण पक्ष की अष्टमी के दिन जो भी मां अपने बेटे की दीर्घायु के लिए व्रत करेगी, उसके पुत्र को दीर्घायु का आशीर्वाद मिलेगा।
बाजारों में बढ़ी भीड़ और तेजी
जितिया पर्व को लेकर देवघर के बाजारों में भी काफी चहल-पहल देखने को मिल रही है। पर्व में प्रयोग होने वाली सामग्री के दामों में बढ़ोतरी हुई है। आम दिनों में 40 से 50 रुपये किलो बिकने वाला सतपथु अब करीब 200 रुपये किलो के भाव से बिक रहा है और झिंगली की कीमत भी 140 रुपये किलो तक पहुंच गई है। मछली बाजार में भी सुबह से काफी भीड़ रही, क्योंकि इस पर्व के दौरान मछली का सेवन करने की परंपरा रही है।
निर्जला व्रत और साहिबगंज में स्नान
धर्माचार्यों के मुताबिक, शनिवार से 10:30 बजे से महिलाएं निर्जला व्रत रखेंगी। यह व्रत रविवार सुबह करीब 7:30 बजे तक चलेगा, जिसके बाद व्रती महिलाएं पारण करेंगी। वहीं साहिबगंज में पर्व के पहले दिन माताओं ने मुक्तेश्वर गंगा घाट पर स्नान किया और गंगाजल भरकर घर पहुंचीं। व्रत रखने वाली महिलाओं का कहना है कि यह पर्व बेटे एवं बेटी दोनों के लिए होता है।





