रांची : जैन धर्म के पर्वराज पर्युषण के तहत दशलक्षण महापर्व के छठे दिन सोमवार को रांची में उत्तम संयम धर्म की आराधना की गई। ससंघ विराजमान पूज्य आचार्य श्री ज्ञेयसागर जी महाराज और मुनिश्री नियोग सागर जी महाराज के पावन सानिध्य में श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से पूजा-अर्चना की। सभा को संबोधित करते हुए मुनिराजों ने कहा कि संयम आत्मा का स्वभाव है। इसके बिना सम्यक ज्ञान और सम्यक दर्शन की मंजिल प्राप्त नहीं की जा सकती। भाव, विचार, वाणी और व्यवहार के चारों स्तरों पर संतुलन बनाए रखना ही संयम की सच्ची परिभाषा है। इस अवसर पर रांची जैन समाज की ओर से सामूहिक पूजन, अर्घ्य समर्पण और महाआरती का आयोजन विधि-विधान से किया गया।
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दोनों जैन मंदिरों में हुआ पूजा विधान
प्रातःकाल कलशाभिषेक के बाद रांची स्थित दोनों जैन मंदिरों में पूजा विधान संपन्न हुआ। इस दौरान मंदिर श्रद्धालुओं से खचाखच भरे रहे। अपर बाजार जैन मंदिर के बड़े हॉल में सामूहिक पूजन के दौरान सुगंध दशमी व्रत का पूजन किया गया। अपर बाजार मंदिर में अशोक कुमार, आकाश कुमार, अरिहंत सेठी परिवार और सरोज कुमार, अंकुर कुमार पापड़ीवाल परिवार की ओर से शांतिधारा की गई। वासुपूज्य जिनालय में निर्मल कुमार, निलेश कुमार सोगानी परिवार तथा अशोक कुमार, अनिल कुमार, सुनील कुमार अजमेरा परिवार की ओर से शांतिधारा की गई। सामूहिक पूजन में शांतिधारा करने वालों में अभय कुमार, अजय कुमार, अमित कुमार छाबड़ा परिवार, तेजपाल, निर्णय कुमार रॉवका परिवार, अरुण लुहाड़िया परिवार, राकेश कुमार, अंकुश कुमार काला परिवार शामिल रहे।
शाम को महाआरती और सांस्कृतिक कार्यक्रम
शाम को जैन महिला जागृति के सदस्यों की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें महाआरती, डांडिया और धार्मिक प्रश्न मंच प्रतियोगिता हुई। दशलक्षण महापर्व के छठे दिन उत्तम संयम के महत्व पर भी श्रद्धालुओं को बताया गया। संयम का अर्थ आत्म नियंत्रण और आत्म अनुशासन है। यह मनुष्य को इच्छाओं, क्रोध, लोभ और मोह जैसे नकारात्मक भावों पर नियंत्रण रखने में सहायता करता है। उत्तम संयम का अभ्यास आत्म-विकास के साथ सामाजिक जीवन में संतुलन और सद्भाव बनाए रखने में भी सहायक है। इससे मानसिक शांति, नैतिक बल और आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।
24 तीर्थंकरों के समक्ष अर्पित की धूप
दोपहर में आठों कर्मों के नाश के उद्देश्य से श्रद्धालुओं ने 24 तीर्थंकरों के समक्ष धूप अर्पित की। यह धार्मिक आयोजन दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक चला। यह जानकारी जैन समाज के मीडिया प्रभारी राकेश काशलीवाल ने दी।









