आत्महत्या रोकथाम दिवस पर रांची में जागरूकता रैली, 16 तक अभियान

रांची : विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर गुरुवार को सिविल सर्जन सभागार, रांची में जागरूकता कार्यक्रम और रैली का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया और स्वास्थ्यकर्मियों व कर्मचारियों को आत्महत्या रोकथाम

आत्महत्या रोकथाम दिवस
स्वास्थ्यकर्मियों और ANMTC की छात्राओं ने जागरूकता रैली निकाली।

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रांची : विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर गुरुवार को सिविल सर्जन सभागार, रांची में जागरूकता कार्यक्रम और रैली का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया और स्वास्थ्यकर्मियों व कर्मचारियों को आत्महत्या रोकथाम के प्रति जागरूक रहने तथा जरूरतमंदों की सहायता के लिए हमेशा तत्पर रहने की शपथ दिलाई। कार्यक्रम का उद्देश्य आत्महत्या रोकथाम को लेकर आम लोगों में जागरूकता बढ़ाना, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर खुलकर बातचीत को बढ़ावा देना और मानसिक संकट की स्थिति में समय पर सहायता लेने के लिए लोगों को प्रेरित करना रहा।

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इस वर्ष विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस की थीम “Changing the Narrative on Suicide” है। इसका उद्देश्य आत्महत्या से जुड़े संवाद और दृष्टिकोण में सकारात्मक बदलाव लाना तथा मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या रोकथाम के लिए संवेदनशील, सहयोगात्मक और सहायक वातावरण तैयार करना है।

स्वास्थ्यकर्मियों ने निकाली जागरूकता रैली

कार्यक्रम के बाद स्वास्थ्यकर्मियों और एएनएमटीसी की छात्राओं ने जागरूकता रैली निकाली। रैली के माध्यम से लोगों को आत्महत्या रोकथाम, मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने और मानसिक परेशानी की स्थिति में समय पर सहायता लेने का संदेश दिया गया।

चुप्पी को बातचीत और निराशा को आशा में बदलना होगा

अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने कहा कि मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए सकारात्मक सोच जरूरी है। उन्होंने कहा कि “चुप्पी को बातचीत में बदलना होगा और निराशा को आशा में बदलने का प्रयास करना होगा।” उन्होंने कहा कि अक्सर लोग चाहते हैं कि उनके जीवन में चीजें उसी तरह हों, जैसा वे सोचते हैं। इस मानसिकता में सकारात्मक बदलाव लाने की जरूरत है। अत्यधिक गुस्सा, चिंता और असंतोष मानसिक तनाव बढ़ाने वाले प्रमुख कारक हैं। स्वस्थ और संतुलित जीवन के लिए इन भावनाओं पर नियंत्रण रखना जरूरी है। शशि प्रकाश झा ने कहा कि मानसिक तनाव या किसी तरह की मानसिक परेशानी से जूझ रहे व्यक्ति को अकेले इसका सामना नहीं करना चाहिए। समय पर सहायता लेना बेहद जरूरी है। मानसिक उलझनों और परेशानियों को समय रहते परिवार, दोस्तों या चिकित्सक के साथ साझा करने से आत्महत्या का खतरा कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सुख-दुख और जीवन की कठिन परिस्थितियों में एक-दूसरे से खुलकर बात करना जरूरी है। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सहायता के लिए टेली-मानस हेल्पलाइन 14416 पर संपर्क किया जा सकता है।

परेशानियों को साझा करना जरूरी

जिला नोडल पदाधिकारी डॉ. सीमा गुप्ता ने कहा कि मानसिक परेशानी और आत्महत्या की प्रवृत्ति का एक महत्वपूर्ण कारण अपनी परेशानियों और भावनाओं को दूसरों के साथ साझा नहीं करना है। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति के साथ सहज महसूस हो, उसके साथ अपनी परेशानियां साझा करनी चाहिए, ताकि समय रहते भावनात्मक सहयोग और आवश्यक सहायता मिल सके। उन्होंने सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग को भी मानसिक तनाव का एक कारण बताया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। जीवन में आने वाली समस्याओं से भागने के बजाय उनका समाधान तलाशने और जरूरत पड़ने पर दूसरों की मदद लेने की आवश्यकता है। डॉ. सीमा गुप्ता ने कहा कि किसी व्यक्ति के व्यवहार में अचानक बदलाव, निराशा, सामाजिक दूरी बनाना, लगातार तनाव में रहना या भावनात्मक रूप से असामान्य व्यवहार जैसे संकेतों को गंभीरता से लेना चाहिए। ऐसे समय में व्यक्ति से संवाद स्थापित कर उसे आवश्यक सहयोग और सहायता उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है।

सकारात्मक व्यवहार अपनाने पर जोर

चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. ए.आर. मुस्ताफी ने कहा कि जीवन के हर पड़ाव पर नकारात्मक परिस्थितियां आ सकती हैं, लेकिन उन पर अत्यधिक ध्यान देने के बजाय सकारात्मक व्यवहार बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने नकारात्मक वातावरण और परिस्थितियों से दूर रहते हुए सकारात्मक सोच तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अवसाद की स्थिति में व्यक्ति के व्यवहार और दैनिक गतिविधियों में बदलाव दिखाई दे सकता है। व्यक्ति लगातार उदास रह सकता है, दोस्तों और परिजनों से दूरी बनाने लगता है तथा पहले पसंद आने वाली गतिविधियों में उसकी रुचि कम हो सकती है। ऐसे बदलावों को नजरअंदाज करने के बजाय उन्हें गंभीरता से समझना और जरूरत पड़ने पर करीबी लोगों व विशेषज्ञ की मदद लेना जरूरी है।

16 सितंबर तक स्कूल-कॉलेजों में चलेगा अभियान

जिले में विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के तहत 10 से 16 सितंबर 2026 तक विभिन्न स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। विद्यार्थियों और युवाओं को मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन, भावनात्मक सहयोग, आत्महत्या के चेतावनी संकेतों और समय पर सहायता लेने के महत्व की जानकारी दी जाएगी। अभियान के दौरान लोगों को संदेश दिया जाएगा कि मानसिक परेशानी या संकट की स्थिति में अकेले संघर्ष करने के बजाय परिवार, मित्र, शिक्षक या स्वास्थ्यकर्मी से बात करें और समय पर सहायता लें।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, हर साल दुनिया भर में लगभग 7 लाख 20 हजार से अधिक लोग आत्महत्या करते हैं। यह 15 से 29 वर्ष के युवाओं के बीच मौत के प्रमुख कारणों में से एक है। कार्यक्रम में जिला नोडल पदाधिकारी डॉ. सीमा गुप्ता, चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. ए.आर. मुस्ताफी, चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. दीपशिखा, डॉ. वीणा, जिला कार्यक्रम प्रबंधक प्रवीण कुमार सिंह, क्षेत्रीय समन्वयक श्वेता वर्मा, डीपीसी प्रीति, डीडीएम संजय, अभिषेक, सरोज सहित अन्य पदाधिकारी, कर्मचारी और स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे।

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