नई दिल्ली : संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने दुनिया के पारंपरिक नक्शे में ऐतिहासिक बदलाव करते हुए एक नए विश्व मानचित्र को अपनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। यह नया नक्शा अफ्रीका और भूमध्य रेखा के पास स्थित अन्य महाद्वीपों और देशों के वास्तविक भौगोलिक आकार को अधिक सटीकता से प्रदर्शित करता है। टोगो द्वारा पेश किए गए और अफ्रीकी संघ (AU) के 54 सदस्य देशों द्वारा समर्थित “करेक्ट द मैप” (नक्शा सुधारें) प्रस्ताव के पक्ष में फ्रांस और ब्रिटेन समेत कुल 164 देशों ने मतदान किया।
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‘इक्वल अर्थ कार्टोग्राफिक प्रोजेक्शन’ दिया गया नाम
संयुक्त राष्ट्र के इस प्रस्ताव में नए नक्शे को “इक्वल अर्थ कार्टोग्राफिक प्रोजेक्शन” नाम दिया गया है। इसका उद्देश्य वैश्विक मानचित्रण में भौगोलिक सटीकता में सुधार करना है। इस मतदान में अमेरिका एकमात्र ऐसा देश रहा जिसने प्रस्ताव के विरोध में वोट दिया, जबकि 6 देश मतदान प्रक्रिया से गैरहाजिर रहे। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र का यह प्रस्ताव अनिवार्य या बाध्यकारी नहीं है, लेकिन यह दुनियाभर की सरकारों, शैक्षणिक संस्थानों और अंतरराष्ट्रीय निकायों को 16वीं सदी के पारंपरिक ‘मर्केटर नक्शे’ के बजाय नए नक्शे का उपयोग करने के लिए प्रेरित करेगा।
मर्केटर नक्शा और उसकी ऐतिहासिक कमियां
वर्ष 1569 में फ्लेमिश कार्टोग्राफर जेरार्डस मर्केटर द्वारा बनाया गया नक्शा पिछले 450 से अधिक वर्षों से दुनिया भर में इस्तेमाल हो रहा था। इस नक्शे को मुख्य रूप से यूरोपीय खोजकर्ताओं को समुद्री नेविगेशन में मदद करने के लिए डिजाइन किया गया था। हालांकि, 3D ग्लोब को 2D कागज पर प्रदर्शित करने की तकनीकी सीमा के कारण मर्केटर नक्शे में ध्रुवीय क्षेत्रों (जैसे यूरोप और उत्तरी अमेरिका) का आकार उनकी वास्तविक सीमाओं से काफी बड़ा दिखता था, जबकि भूमध्य रेखा के पास स्थित अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका जैसे विशाल महाद्वीप बहुत छोटे दिखाई देते थे। उदाहरण के लिए, मर्केटर नक्शे में अफ्रीका को ग्रीनलैंड के बराबर दिखाया जाता था, जबकि वास्तविकता में अफ्रीका ग्रीनलैंड से लगभग 14 गुना बड़ा है।
2018 में तैयार हुआ था ‘इक्वल अर्थ’ मॉडल
मर्केटर नक्शे की इस भौगोलिक विसंगति को दूर करने के लिए वर्ष 2018 में कार्टोग्राफर्स की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने ‘इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन’ विकसित किया था। यह मॉडल सभी महाद्वीपों के आनुपातिक और सापेक्ष आकार को एकदम सटीक रूप से दिखाता है। फरवरी में अफ्रीकी संघ ने इसे आधिकारिक रूप से स्वीकार किया था। टोगो के विदेश मंत्री रॉबर्ट डसी ने मतदान से पूर्व कहा कि एक निष्पक्ष और पारदर्शी दुनिया की शुरुआत एक निष्पक्ष नक्शे से ही होती है। वहीं फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि गलत नक्शे को सही करना सच्चाई की दिशा में एक बड़ा कदम है। दूसरी ओर, अमेरिका ने इस मतदान की आलोचना करते हुए कहा कि यूएन को अधिक गंभीर वैश्विक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
भारत की स्थिति और मर्केटर का भविष्य
इस नए ‘इक्वल अर्थ’ नक्शे में भारत की भौगोलिक स्थिति, सीमाओं या आकार में कोई बदलाव नहीं हुआ है। भारत जिस स्थान और अनुपात में पहले दिखाई देता था, नए नक्शे में भी उसी स्वरूप में बना हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार, मर्केटर नक्शा पूरी तरह से समाप्त नहीं होगा। जहाजों के समुद्री नेविगेशन और हवाई दिशा-निर्धारण में कोणों की सटीक जानकारी देने के कारण इसका तकनीकी उपयोग जारी रहेगा।




